देश की सबसे बड़ी पैरामिलिट्री फोर्स सीआरपीएफ ऐसी तकनीक को विकसित करने में जुटी है जिससे नक्सलियों द्वारा लूटे गए हथियारों का पता लगाया जा सके।
स्वचालित और अर्ध-स्वचालित राइफलें/एके राइफल्स, एसएलआर, आईएनएसएएस राइफल्स और रिवाल्वर जैसे हथियार सुरक्षा बलों द्वारा आतंकियों और नक्सल विरोधी अभियानों में इस्तेमाल किए जाते हैं, उन्हें लूटकर नक्सली उनका इस्तेमाल हमलों के लिए करते हैं।
एक आधिकारिक सूत्र के अनुसार सीआरपीएफ कुछ प्राईवेट कंपनियों के संपर्क में है, जो इस समस्या से निपटने के लिए जीपीएस ट्रैकर / आरएफआईडी चिप या बायोमेट्रिक सॉफ्टवेयर प्रदान कर सकती है जिससे लूटे गए हथियार को ट्रैक या फिर बेकार किया जा सके।
सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल राजीव राय भटनागर ने इस बात की पुष्टि की है कि सीआरपीएफ ऐसी तकनीक की तलाश कर रही है, हालांकि ये योजना अभी शुरुआती चरण में है।