पिछले दिनों सीआरपीएफ आरटीसी जोधपुर में एक सिपाही ने खुद को कमरे में बंद कर अपनी सर्विस राइफल से गोली मार ली थी। इस घटना से व्यथित होकर बल के एक इंस्पेक्टर ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। बीस वर्ष की सेवा के दौरान विभिन्न जगहों पर ड्यूटी कर चुके उक्त इंस्पेक्टर ने सीआरपीएफ में अफसरों की कार्यप्रणाली को गौर से देखा है। प्रधानमंत्री को लिखे खुले पत्र में निरीक्षक ने कई अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये अफसर जवानों को ड्यूटी के दायरे से बाहर वाले कामों के लिए परेशान करते हैं। खास बात ये है कि इस पत्र में जिन डीआईजी, कमांडेंट और दूसरे अधिकारियों का नाम है, उसमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें मिलती रही हैं। एक डीआईजी को पिछले दिनों जबरन रिटायरमेंट देने का आदेश जारी हुआ था। सूची में ऐसे अफसरों का भी नाम है, जिन पर यौन शोषण के आरोप लग चुके हैं। उन अफसरों की जांच भी हुई और मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा है। इस खत की जानकारी बल मुख्यालय को है। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, अभी पीएमओ से कोई फॉरवर्ड लैटर प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र में लिखी बातों पर गौर कर रहे हैं। मामले की तह में जाकर सच्चाई का पता लगाया जाएगा।
ऐसा कुछ कर रहे CRPF के कई अफसर
कई अफसर अपने खास अधीनस्थ अधिकारियों व दूसरे स्टाफ से मिलकर मनमानी करते हैं। सही बात कहने वाले जवान का शोषण होता है। तकरीबन सभी बटालियन, ग्रुप सेंटर और ट्रेनिंग सेंटर में ये सब देखने को मिल जाएगा। ऐसी कई जगह, भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी हैं। कई बड़े अफसर जब कहीं ट्रांसफर पर जाते हैं, तो वे अपने खास जवानों को साथ ले जाते हैं ताकि भ्रष्टाचार एवं अनैतिक कार्यों को बखूबी अंजाम दिया जा सके। जवानों के नाम पर टीवी, फ्रिज और दूसरा सामान खरीदकर, सीओ, डीआईजी व आईजी, उसे अपने घर पर लगाते हैं। जवानों को ड्यूटी के लिए बरसात में गाड़ी तक नहीं मिलती, जबकि ये अफसर अपने परिवार एवं रिश्तेदारों को घुमाने के लिए दो-तीन गाड़ियां रखते हैं। राशन-खरीद में जमकर कमीशन खाया जाता है। ट्रांसफर होने के बाद ये अधिकारी, सरकारी सामान अपने घर में ले जाते हैं।
खत में है CRPF के इन अफसरों का नाम
आईजी खजान सिंह, डीआईजी भूपेंद्र सिंह, आरएस रौतेला, भानू प्रताप सिंह, भूपेंद्र कुमार, सीओ मेघराज, हिलाल फिरोज, दीपक डाउंडियल सीओ, डीआईजी अमित तनेजा, डीआईजी रास बिहारी, तारिक हुसैन, एसएन झा, एन भट्टाचार्य, आरके शर्मा, प्रेम कांत भूरिया, जेपी के रे, डीएस ग्रेवाल, जयदेव केसरी, जेएन मीणा, मोहिंद्र कुमार, प्रभात झा, एसएन मिश्रा, बलराम बेहेरा, बीडी दास और बीबी वैद्य शामिल हैं। कुछ अफसर रिटायर भी हुए हैं। पत्र में सीओ आर जय कुमार, सुनंद कुमार, छोटन ठाकुर, राजीव रंजन, हबीब असगर, रविंद्र भगत, प्रेम सिंह कटोच, गणेश प्रसाद, रविकांत बेहेरा, अशोक स्वामी, सुभाष चंद्रा एसी, सियाम मेहरा सीओ, विनोद कार्तिक सीओ, करुणा राय सीओ, एसएस रिजवी सीओ, अशोक कुमार नाथ टूआईसी, राजशेखर राउत एसी, सुभाष चंद्र सीओ, शाहनवाज डीसी, राजप्रकाश बिहारी एसी, धीरज कुमार टूआईसी, संजय कुमार एसी, जगदेव सिंह डीसी, विजय शंकर पांडे सीओ, जगजीत सिंह डीसी, नीरज पांडे सीओ, रविंद्र प्रसाद सीओ, पंकज सिंह सीओ, रविंद्र सिंह टूआईसी दिनेश सीओ, एचएस घुम्मन सीओ, जी कुमार सीओ, सुदेश कुमार सीओ व आलोक वीर यादव सीओ का नाम शामिल है।
आईपीएस अधिकारी भी कुछ नहीं बोलते
इंस्पेक्टर ने अपने खत में लिखा है कि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को ये बातें पता होती हैं, लेकिन वे कार्रवाई नहीं करते। वजह, रिटायरमेंट के बाद आईपीएस अफसरों ने बल के जवानों को अपने घरों पर काम करने के लिए रखा है। रेजिमेंटल समारोह में जवानों के पैसे से शराब पी जाती है। बटालियन में समारोह के लिए जवानों से पैसा एकत्रित कर उसे अपनी जेब में रख लेते हैं। ट्रेनिंग सेंटर में रिक्रूट को घटिया सामान देकर उसकी ज्यादा कीमत वसूलते हैं। लगभग सभी आरटीसी में पासिंग आउट परेड में तैयारी, साज सज्जा और फोटोग्राफी के नाम पर एक जवान से लगभग आठ हजार रुपये एकत्रित कर अफसर, उसे अपनी जेब में रख लेते हैं। बड़ा खाना के नाम पर रेजिमेंट फंड से पैसा निकाल उसके फर्जी बिल तैयार होते हैं। नियमों को ताक पर रखकर अपनी पसंद का एसएम, बीएचएम, जेसीएचएम बीक्यू, सीक्यू, स्टोरमैन चुनना, जो अधिकारियों के साथ मिलकर जवानों का शोषण करते हैं।
पोस्टिंग में क्षेत्रवाद और जातिवाद का बोलबाला
सिपाही से लेकर बड़े अफसरों की तैनाती में क्षेत्रवाद और जातिवाद का बोलबाला रहता है। घर पर चार-पांच जवानों को सेवादार बनाकर रखते हैं। कुछ अधिकारी रिटायरमेंट के बाद भी ये सेवाएं लेते हैं। जवानों को समय पर छुट्टी नहीं मिलती। छुट्टी देने के नाम पर उन्हें परेशान किया जाता है। सही बात कहने पर जवान को अनुशासनहीन बताकर उसे अटैचमेंट ड्यूटी व कोर्स पर भेज देते हैं। जवानों को गालियां तक दी जाती हैं। खास लोगों को इनाम मिलता है। पत्र में लिखा है कि ऐसा नहीं है कि सभी अधिकारी खराब हैं। बहुत से अधीनस्थ अधिकारी अच्छे भी हैं। दस पंद्रह फीसदी अधिकारी ऐसे हैं जो तानाशाह की तरह व्यवहार करते हैं। कथित तौर से भष्टाचार और अनैतिक कार्यों में लिप्त हैं। इनकी वजह से बल में आत्महत्या और भातृहत्या के मामले बढ़ रहे हैं।
खत में कई बातों का निवारण भी बताया गया है
हेडक्वॉर्टर स्तर पर शिकायत निवारण सिस्टम को मजबूत बनाया जाए। जवानों के शोषण एवं भ्रष्टाचार की शिकायत की सूचना सीधे महानिदेशालय को देने की व्यवस्था हो। तबादला होने पर अफसरों द्वारा अपने चहेतों को साथ ले जाने पर अंकुश लगे। रेजिमेंटल फंड का स्वतंत्र एजेंसी से वार्षिक ऑडिट हो। रिक्रूट्स से अवैध वसूली बंद हो। अफसर की अधिक शिकायतें हैं तो उससे कमांड वापस ली जाए। डीआईजी रैंक तक का ट्रांसफर संतोष एप से हो। राशन खरीद को पारदर्शी बनाएं। उसकी निगरानी महानिदेशालय स्तर पर की जाए। जवानों को सेवादार बनाना बंद होना चाहिए। मंत्रालय स्टाफ व दूसरे कर्मी, जिन्हें पीटी परेड से छूट मिली है, उसे खत्म करें। वजह, ये सभी कर्मी समान जोखिम भत्ता लेते हैं। जवानों का क्लेम समय पर नहीं मिलता। मिनिस्ट्रियल स्टाफ, अधीनस्थ अधिकारियों की छुट्टी की नोट शीट भी समय से नहीं डालते। बाबूओं को कंपनी में अटैच किया जाना चाहिए।