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सीआरपीएफ ने बनाया प्लान, बस्तर में जल्द शुरू होगी नक्सलियों पर जवाबी कार्रवाई

Fri, 28 Apr 2017 07:06 AM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट
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सोमवार को बस्तर में सबसे बड़े नक्सली हमले में 25 जवानों की शहादत के बाद सीआरपीएफ ने नक्सलियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर ली है। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर इलाके में सीआरपीएफ का यह अभियान जल्द शुरू होगा। नक्सली हमले से संबंधित रिपोर्ट बृहस्पतिवार को गृह मंत्रालय को सौंप दी गई।
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गृह मंत्रालय में नक्सली मामलों के सलाहकार के विजय कुमार और सीआरपीएफ के कार्यकारी महानिदेशक सुदीप लखटकिया ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को रिपोर्ट सौंप दी। राजनाथ सिंह ने कुमार और लखटकिया को सुकमा में ही कैंप कर हमले की पूरी सच्चाई पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। रिपोर्ट सौंपने के बाद इन दोनों अधिकारियों ने गृह राज्यमंत्री हंस  राज अहीर और गृहसचिव राजीव महर्षि के साथ लंबी बैठक की। 

रिपोर्ट में सुकमा हमले से संबंधित चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। इसमें कहा गया है कि जिधर से नक्सली गोली चला रहे थे, उधर सड़क निर्माण सुरक्षा में लगे सीआरपीएफ जवानों को सिर्फ गांव के बूढे़, बच्चे और महिलाएं ही नजर आ रहे थे। यही वजह थी कि स्वचालित हथियारों से लैस होने के बावजूद जवान कारगर जवाबी कार्रवाई नहीं कर सके। इससे पहले कि नक्सलियों के इस मानव ढाल की कायरतापूर्ण हरकत का इल्म हो पाता करीब 31 जवानों के शरीर को गोलियां भेद चुकी थीं। 
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रिपोर्ट के मुताबिक हमले के समय 36 जवान सुरक्षा के लिहाज सड़क निर्माण स्थल पर दो जगहों पर बंटे हुए थे। नक्सलियों ने बड़ी चालाकी से मानव ढाल के पीछे से पहले टुकड़ी पर हमला किया। जब इस टुकड़ी ने पोजिशन लिया तो नक्सलियों ने दूसरी टुकड़ी पर हमला बोल दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गोली चलने की दिशा में गांव वालों की मौजूदगी की वजह से जवान गोली खाते रहे। रिपोर्ट के मुताबिक नक्सलियों की संख्या काफी अधिक थी। हालांकि गांव वालों की मौजूदगी की वजह से उनकी संख्या का पता नहीं चल पाया।

रिपोर्ट में यह माना गया है कि सुरक्षा बल के लगभग एक ही समय में रोज आवाजाही की वजह से वह नक्सलियों का आसान शिकार बन गए। कहा गया है कि व्यावहारिक दिक्कतों के कारण उन इलाकों में सड़क निर्माण का काम पांच से आठ घंटे ही चल पाता है।
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