जवानों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है
सिलचर में तैनात जवानों एवं दूसरे छोटे रैंक के अधिकारियों को सभी तरह की बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। सूत्रों का कहना है कि ग्रुप सेंटर पर स्वच्छ पेयजल की दिक्कत कई सालों से चल रही है। जवानों को अपने विश्राम के समय में पेयजल का जुगाड़ करना पड़ता है।
अधिकतर जवान कैंटीन से पानी खरीदते हैं। कई बार कैंटीन में ये सुनने को भी मिलता है कि दो सप्ताह बाद पानी आएगा। तब तक आप अपना जुगाड़ कर लें। हालांकि ग्रुप सेंटर में एक कुआं खोदा गया है, लेकिन उसका पानी पीने लायक नहीं है।
कई बार तो जवानों को आसपास के नदी नाले का गंदा पानी पीना पड़ता है। एक अधिकारी के मुताबिक, पानी को लेकर वहां आए दिन जवानों और अफसरों के बीच कहासुनी होती रहती है। पानी के चक्कर में जवान ड्यूटी पर लेट हो जाते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें अपने सीनियर अधिकारी की डांट फटकार खाकर या कोई दूसरी सजा के रूप में उठाना पड़ता है।
सीआरपीएफ छोड़ने वालों की संख्या बढ़ रही है
राजपत्रित अधिकारी
| साल |
स्वेच्छा से नौकरी छोड़ी |
त्यागपत्र |
| 2014 |
12 |
30 |
| 2015 |
13 |
24 |
| 2016 |
26 |
31 |
अधीनस्थ अधिकारी
| साल |
स्वेच्छा से नौकरी छोड़ी |
त्यागपत्र |
| 2014 |
283 |
54 |
| 2015 |
142 |
61 |
| 2016 |
502 |
40 |
अन्य रैंक
| साल |
स्वेच्छा से नौकरी छोड़ी |
त्यागपत्र |
| 2014 |
1938 |
431 |
| 2015 |
1029 |
348 |
| 2016 |
2013 |
142 |
तनाव, ह्रदयघात और मलेरिया से जान गंवाने वाले सीआरपीएफ कर्मी (बिहार, छत्तीसगढ़ व झारखंड)
| साल |
तनाव |
ह्रदयघात |
मलेरिया |
अन्य |
| 2015 |
35 |
82 |
13 |
277 |
| 2016 |
26 |
92 |
05 |
353 |
| 2017 |
16 |
45 |
02 |
250 |