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बीमार पत्नी को घर पर छोड़कर ड्यूटी पर लौटे सीआरपीएफ कर्मी ने की आत्महत्या की कोशिश

Sat, 07 Jul 2018 07:13 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली

घर पर बीमार पत्नी को छोड़कर ड्यूटी पर लौटे सीआरपीएफ के एक सब-इंस्पेक्टर ने ग्रुप सेंटर पर पहुंचते ही खुद को तीन-चार गोली मार ली। नाजुक हालत में उसे गोवाहाटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। सीआरपीएफ मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि सब इंस्पेक्टर को ग्रुप सेंटर के डीआईजी ने कथित तौर पर प्रताड़ित किया था। इतना ही नहीं, उसके वेतन बाबत भी कई तरह की दिक्कतें खड़ी कर दी गईं। ग्रुप सेंटर पर स्वच्छ पेयजल को लेकर भी आए दिन जवानों और अधिकारियों के बीच कहासुनी की घटनाएं देखने को आती रही हैं।



मुख्यालय के एक अधिकारी ने अपनी पहचान छिपाने का आग्रह करते हुए बताया कि सब इंस्पेक्टर नरेश कुमार अपने घर पर छुट्टी गया हुआ था। वहां पर उसकी पत्नी बीमार हो गई। उसने आला अधिकारियों से छुट्टी बढ़ाने का आग्रह किया। यह मामला जब सेंटर के डीआईजी की टेबल पर पहुंचा तो उसे वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। उसने छुट्टी बढ़ाने का आग्रह किया, लेकिन बात नहीं बनी।

डीआईजी ने उसकी एक न सुनी और उसे तुरंत ग्रुप सेंटर पर पहुंचने का आदेश जारी कर दिया। उसने अपनी पत्नी के सभी मेडिकल दस्तावेज दिखाए, लेकिन अधिकारी नहीं माना। अधिकारी ने उसे चेतावनी दे डाली कि यदि उसने छुट्टी की तो उसका वेतन रोक दिया जाएगा। हालांकि बाद में उसे कुछ इस तरह की दिक्कतें झेलनी भी पड़ी। कुछ दिन बाद जब वह ड्यूटी पर लौटा तो उसने मुख्य गेट के अंदर जाते ही एक साथी से राइफल ली और खुद को कई गोलियां मार ली।


उसे पहले सिलचर के अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण सब इंस्पेक्टर को गोवाहाटी के अस्पताल में रैफर कर दिया गया। इस बाबत जब सीआरपीएफ के मुख्यालय में तैनात डीआईजी दिनाकरण से बात की गई तो उन्होंने इस मामले में जानकारी लेकर कुछ बताने की बात कही।

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जवानों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है 

सिलचर में तैनात जवानों एवं दूसरे छोटे रैंक के अधिकारियों को सभी तरह की बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। सूत्रों का कहना है कि ग्रुप सेंटर पर स्वच्छ पेयजल की दिक्कत कई सालों से चल रही है। जवानों को अपने विश्राम के समय में पेयजल का जुगाड़ करना पड़ता है।

अधिकतर जवान कैंटीन से पानी खरीदते हैं। कई बार कैंटीन में ये सुनने को भी मिलता है कि दो सप्ताह बाद पानी आएगा। तब तक आप अपना जुगाड़ कर लें। हालांकि ग्रुप सेंटर में एक कुआं खोदा गया है, लेकिन उसका पानी पीने लायक नहीं है।

कई बार तो जवानों को आसपास के नदी नाले का गंदा पानी पीना पड़ता है। एक अधिकारी के मुताबिक, पानी को लेकर वहां आए दिन जवानों और अफसरों के बीच कहासुनी होती रहती है। पानी के चक्कर में जवान ड्यूटी पर लेट हो जाते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें अपने सीनियर अधिकारी की डांट फटकार खाकर या कोई दूसरी सजा के रूप में उठाना पड़ता है।

सीआरपीएफ छोड़ने वालों की संख्या बढ़ रही है 
राजपत्रित अधिकारी 
साल  स्वेच्छा से नौकरी छोड़ी त्यागपत्र 
2014  12 30
2015 13   24 
2016 26  31

अधीनस्थ अधिकारी
साल स्वेच्छा से नौकरी छोड़ी त्यागपत्र 
2014 283 54
2015 142   61
2016 502  40

अन्य रैंक
साल स्वेच्छा से नौकरी छोड़ी त्यागपत्र
2014 1938 431
2015 1029  348
2016  2013  142

तनाव, ह्रदयघात और मलेरिया से जान गंवाने वाले सीआरपीएफ कर्मी (बिहार, छत्तीसगढ़ व झारखंड) 
साल तनाव  ह्रदयघात मलेरिया अन्य
2015 35 82 13 277
2016 26 92 05 353
2017 16 45 02  250
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