देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के दिव्यांग योद्धाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर साइकिल यात्रा निकाली है। इस यात्रा के दौरान बल के दिव्यांग योद्धाओं का जज्बा एवं साहस देखने को मिलेगा। कभी न हार मानने वाले ये योद्धा गुरुवार को गुजरात के साबरमती आश्रम से दिल्ली राजघाट के लिए रवाना हुए हैं। लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय कर ये दिव्यांग दो अक्तूबर को गांधी जयंती के मौके पर राजघाट पहुंचेंगे।
गुजरात के राज्यपाल, आचार्य देवव्रत ने अपने ई-संदेश के साथ इस रैली का शुभारम्भ किया। उन्होंने इसे प्रेरणादायक बताते हुए दिव्यांग योद्धाओं की प्रशंसा की है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अपने ट्वीट के माध्यम से कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के आंतरिक सुरक्षा योद्धा कई क्षेत्रों में सक्रिय रूप से देश की सेवा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री रूपाणी के मुताबिक कर्तव्य पथ पर कई बार इन जवानों के जीवन और अंगों के लिए खतरा बना रहता है। सीआरपीएफ के अनेक शूरवीरों ने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। कई निर्भीक योद्धा गंभीर रूप से घायल होते हैं और अपनी सेवा के दौरान महत्वपूर्ण अंग खो देते हैं।
इन दिव्यांग योद्धाओं के सहयोग के लिए, सीआरपीएफ ने इन योद्धाओं के गौरव, मनोबल और आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसी अनुक्रम में सीआरपीएफ द्वारा स्किलिंग और रीस्किलिंग कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसके जरिए दिव्यांग योद्धाओं को पहले पैरा-स्पोर्ट्स के लिए और बाद में साइबर योद्धाओं के रूप में कुशल किया जाएगा।
लगभग 900 किलोमीटर की यह दूरी 16 दिन में तय की जाएगी। दिल्ली पहुंचने से पहले यह यात्रा गुजरात, राजस्थान और हरियाणा से होकर गुजरेगी। जैसे-जैसे ही यह रैली अपने मार्ग पर विभिन्न सीआरपीएफ कैंपों तक पहुंचेगी, उन कैंपों के अधिकारी और जवान भी रैली में शामिल होते रहेंगे। यह टीम दिन में यात्रा करेगी व रात को पूर्व निर्धारित स्थानों पर ठहरेगी। टीम को चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए यात्रा के दौरान मेडिकल टीम के साथ एक एंबुलेंस भी मौजूद रहेगी।