देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में गत सप्ताह 'लांस नायक' और 'नायक' रैंक दोबारा से शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस बाबत जवानों से सुझाव लिए जा रहे हैं। अब 'अलायन्स ऑफ ऑल एक्स पैरा मिलिटरी फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' ने बल में 'सूबेदार मेजर' के पद को फिर से बहाल करने की मांग उठा दी है। इसके लिए अलायंस की तरफ से सीआरपीएफ डीजी को एक पत्र भेजा गया है।
'अलायन्स ऑफ ऑल एक्स पैरा मिलिटरी फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह ने बताया कि बल में निचले रैंकों में समयबद्ध तरीके से प्रमोशन मिल सकें, इसके लिए उक्त बदलाव आवश्यक हैं। डीजी सीआरपीएफ से आग्रह किया गया है कि वे ऐसा प्रपोजल तैयार करें कि जिसमें एक सिपाही को 20 साल की सेवा करने पर सब इंस्पेक्टर का पद मिल जाए। 25 साल बाद उसे इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन मिले।
बल में सूबेदार मेजर (एसएम) के पदों को फिर से बहाल किए जाने की मांग को लेकर रणबीर सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि पहले यूनिट या ग्रुप सेंटर में 'एसएम' होते थे। उनके कंधे पर रिबन के साथ 'अशोक का सिंह स्तंभ' होता था। एसएम का स्केल भी इंस्पेक्टर से एक पायदान ऊपर होता था। जैसे इंस्पेक्टर को 4600 का ग्रेड पे है तो सूबेदार मेजर को 4800 रुपये का ग्रेड पे मिलता है।
मौजूदा समय में बटालियन कमांडेंट की मनमर्जी से किसी भी इंस्पेक्टर को 'एसएम' बना दिया जाता है। जब मन करे, उसे हटा दिया। अब सूबेदार मेजर के पद को भी लांस नायक और नायक पद के साथ बहाल किया जाए। सीनियर इंस्पेक्टर को ही एसएम पद की बहाली के लिए प्रमोट किया जाए। साथ ही उसके ग्रेड पे भी इजाफा हो। ऐसा करने से सिपाही, गैर-कमीशन प्राप्त अधिकारी, सुपरवाइजरी स्टाफ व पूरी यूनिट में सूबेदार मेजर के पद की गरिमा बढ़ेगी। यह पहल उच्च अधिकारियों से मिले आदेशों को तत्परता से अमल में लाने की दिशा मे महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
रणबीर सिंह ने बताया कि सीआरपीएफ ने लांस नायक व नायक पदों को फिर से बहाल करने के लिए जवानों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। 'सीआरपीएफ' में सिपाही के रैंक में पदोन्नति के अवसर बढ़ें, अनुशासन, जिम्मेदारी, सम्मान और मनोबल में वृद्धि हो, इसके लिए उक्त रैंकों को दोबारा से शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इस बाबत संबंधित रैंक 'सिपाही और हवलदार', अपने सुझाव सीआरपीएफ हेडक्वार्टर को भेज रहे हैं।
बता दें कि 'लांस' नायक और 'नायक' के रैंक, फिलहाल भारतीय सेना में हैं। सीआरपीएफ में भी पहले ये रैंक होते थे, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी से 10 अक्तूबर 1997 को सीआरपीएफ से लांस नायक और नायक के पदों का सिपाही और हवलदार में विलय कर दिया गया था। इसके बाद सिपाही के लिए पदोन्नति का रास्ता लंबा होता चला गया। अब सिपाही रैंक में पहली पदोन्नति होने में ही 20 से 22 साल लग रहे हैं। अब जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें सिपाही को पांच साल में पहली पदोन्नति मिलेगी। वह पद लांस नायक का होगा। दस साल में लांस नायक को नायक की पदोन्नति मिलेगी। इसके बाद 15 साल में हवलदार का पद मिलेगा।