पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से ईंधन की बचत करने की अपील की थी। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले अपने काफिले में पचास फीसदी से ज्यादा वाहन कम कर दिए। दूसरे केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों एवं मंत्रियों ने भी पीएम का अनुसरण करना प्रारंभ कर दिया। विदेश यात्राओं पर भी रोक लग गई। अब इस मुहिम में 'केंद्रीय अर्धसैनिक बल' क्यों पीछे रहें, वहां पर भी कई तरह के प्रतिबंध देखने को मिल रहे हैं।
सीआरपीएफ ने तेल खपत घटाई
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' द्वारा अपने वाहनों की तेल खपत में 10 फीसदी की कटौती करने की बात कही गई है। इसके बाद आईटीबीपी ने एक आदेश जारी कर फोर्स में सभी तरह के विदेश भ्रमण पर रोक लगा दी है। आईटीबीपी महानिदेशालय में महानिरीक्षक (प्रशासन) द्वारा शुक्रवार को बल की समस्त यूनिटों को निर्देश दिया गया है कि अगले आदेश तक किसी भी पदाधिकारी को पर्यटन के लिए विदेश भ्रमण की अनुमति न दी जाए। विदेशी दौरे के लिए अवकाश को मंजूरी न दें। यह निर्देश आईटीबीपी के महानिदेशालय, महानिरीक्षक, सीमान्त/जोनल मुख्यालय और अकादमी सभी के लिए लागू होगा। आईटीबीपी के महानिरीक्षक/निदेशक (चिकित्सा), आंतरिक वित्तीय सलाहकार और बल की सभी शाखाएं, उक्त निर्देश का पालन करेंगी। ट्रेनिंग सेंटर भी इस निर्देश के दायरे में आएंगे।
क्या है आदेश में?
सीआरपीएफ महानिदेशालय ने गुरुवार को जारी एक आदेश में सभी यूनिटों पर वाहनों की तेल खपत में दस फीसदी की कटौती करने की बात कही है। 'सीआरपीएफ' में प्रशासनिक ड्यूटी और स्थिर लोकेशन यानी 'स्टैटिक लोकेशन' पर वाहनों की संख्या में कटौती करने का आदेश जारी किया गया है। सीआरपीएफ के सभी कार्यालयों, इंस्टीट्यूट, ट्रेनिंग सेंटर और दूसरी लोकेशन पर जितने भी वाहन हैं, उनकी तेल खपत को दस फीसदी तक कम कर दिया जाए।
सीआरपीएफ में यह टारगेट मासिक तेल खपत के हिसाब से तय होगा। यानी फोर्स में हर माह औसतन जितने तेल की खपत होती है, उसमें दस प्रतिशत की कटौती की जाए। सीआरपीएफ के महानिदेशालय की तरफ से यह भी कहा गया है कि जो वाहन ऑपरेशनल ड्यूटी में लगे हैं, वहां पर 'विवेकपूर्ण ढंग' से 'सेफ्टी/सिक्योरिटी' से समझौता किए बिना, गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाए।