देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की वार्षिक ऑपरेशंस कॉन्फ्रेंस बुधवार को नई दिल्ली स्थित बल मुख्यालय में आयोजित की गई। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बल के महानिदेशक जीपी सिंह ने प्रमुख तौर से बल के सभी जोनल प्रमुखों और सेक्टर आईजी से जम्मू-कश्मीर काउंटर-टेरर ग्रिड, वामपंथी उग्रवाद (एलडब्लूई) प्रभावित क्षेत्र, मणिपुर में सुरक्षा स्थिति और कानून-व्यवस्था से जुड़ी नई उभरती प्राथमिकताओं पर तेजी से काम के लिए कहा। देश में ऐसे क्षेत्र जो पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे हैं, वहां पर सीआरपीएफ को कड़ी नजर रखनी होगी।
फोर्स मुख्यालय में आयोजित 'वार्षिक ऑपरेशंस कॉन्फ्रेंस 2026' में एसडीजी (ऑपरेशंस), जोनल प्रमुखों, सेक्टर आईजी और वरिष्ठ नेतृत्व ने हिस्सा लिया। बैठक में सभी क्षेत्रों (थिएटर्स) में ऑपरेशनल तैयारियों, लॉजिस्टिक्स और क्षमता-निर्माण (कैपेसिटी-बिल्डिंग) की व्यापक समीक्षा की गई। जेएंडके जोन, नॉर्थ ईस्ट जोन, सेंट्रल जोन, साउथ जोन और आरएएफ सेक्टर के प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख ऑपरेशनल उपलब्धियों, जमीनी तैनाती और रणनीतिक रोडमैप को प्रस्तुत किया।
बैठक में विशेष रूप से लक्षित लॉजिस्टिक सपोर्ट और तेजी से बदलते ऑपरेशनल माहौल के अनुरूप ट्रेनिंग मॉड्यूल को आधुनिक बनाने पर गहन चर्चा हुई। 'नक्सल-मुक्त भारत' की दिशा में लगातार काम कर रहे सीआरपीएफ जवानों की सराहना करते हुए डीजी जीपी सिंह ने कई मोर्चों पर अत्यधिक सतर्कता बरतने पर जोर दिया है। इनमें जेएंडके काउंटर-टेरर ग्रिड, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र, मणिपुर में सुरक्षा स्थिति और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले शामिल हैं।
ऑपरेशनल परिस्थितियों के अनुसार लगातार खुद को ढालने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, डीजी ने हर ऑपरेशनल क्षेत्र में मजबूत क्षमता-निर्माण, सामरिक तैयारियों और अटूट पेशेवर ईमानदारी बनाए रखने का आह्वान किया, ताकि देश के हितों की सर्वोपरि रक्षा की जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, 'एक शून्य जो बहुत कुछ कहता है'। यह बात देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' जवानों की वीरता को लेकर कही गई है।
इसमें बल के उस रिकॉर्ड का जिक्र किया गया, जिसके तहत गत एक वर्ष में किसी भी जवान की ऑपरेशनल मौत नहीं हुई है। सीआरपीएफ के इतिहास में 47 साल बाद इस उपलब्धि को दोहराया गया है। इससे पहले जनवरी 1979 में यह रिकार्ड बना था। पीएम मोदी ने इसके लिए सीआरपीएफ जवानों के अथक प्रयासों की सराहना की है। इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए बल के अनेक जवानों और अफसरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। कुछ ने अपने शरीर के अंग खो दिए तो कई ऐसे भी जांबाज रहे, जिन्हें कई गोलियां लगी, मगर वे ठीक होकर दोबारा से नक्सलियों के साथ लोहा लेने के लिए जंगलों में उतरे।