जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की 'बैसरन' घाटी, जहां पर आतंकवादियों ने दो दर्जन से अधिक पर्यटकों पर फायरिंग कर उन्हें मार डाला था, सीआरपीएफ एकमात्र ऐसा बल था, जिसकी 'क्विक एक्शन टीम' (क्यूएटी) सबसे पहले घटना स्थल पर पहुंची थी। इस टीम में 116 वीं बटालियन के कमांडेंट राजेश कुमार और महिला ग्राउंड कमांडर यानी सहायक कमांडेंट राशि सिकरवार एवं जवान शामिल थे।
खास बात है कि सीआरपीएफ के सीओ को आतंकी हमले की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी। वे एक मूवमेंट पर थे। उन्होंने जब देखा कि 'पौनी' यानी खच्चर घोड़े वाले सड़क पर भाग रहे हैं। राजेश कुमार को लगा कि कोई तो बड़ी घटना हुई है। उन्होंने अपनी गाड़ी से उतरकर पौनी वालों को रोका। उनसे पूछा क्यों भाग रहे हो, तब उन्होंने हमले की बात बताई। इसके अगले ही क्षण राजेश कुमार ने करीब एक डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित कैंप से 'क्यूएटी' को बुलाया। चंद मिनट में क्यूएटी वहां पर पहुंच गई। क्यूएटी ने कई लोगों की जान बचाई। उन्हें अपनी गाड़ी में कैंप के अस्पताल और एसडीएच पहलगाम तक पहुंचाया।
सूत्रों के मुताबिक, 22 अप्रैल को दोपहर करीब ढाई बजे सीआरपीएफ के कमांडेंट राजेश कुमार, किसी मूवमेंट पर थे। वे 'बैसरन' घाटी से गुजर रहे थे। उन्होंने देखा कि पौनी वाले, सड़क पर भागे जा रहे हैं। उन्हें शक हुआ कि कोई तो बड़ी घटना हुई है। राजेश कुमार ने अपनी गाड़ी साइड में लगवाकर पौनी वालों को रोका। पौनी वालों ने बताया, कि 'बैसरन' घाटी में बड़ा आतंकी हमला हुआ है। आतंकियों ने बहुत से लोगों पर गोलियां चलाई हैं। इसके बाद राजेश कुमार, सारा मामला समझ गए। उन्होंने बिना कोई देरी किए, निकटवर्ती कैंप से सीआरपीएफ क्यूएटी को बुलाया। इसके बाद राजेश कुमार ने पहाड़ी की तरफ चलना शुरु कर दिया।
कुछ ही देर में सहायक कमांडेंट 'राशि सिकरवार', क्यूएटी लेकर मौके पर पहुंच गई। सबसे पहले तो उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि वहां पर कोई आतंकी तो नहीं छिपा है। इसके बाद उन्होंने घायलों को वहां से निकालना शुरु किया। वहां से पहलगाम सिटी लगभग सात किलोमीटर दूर था। क्यूएटी ने दूसरे पर्यटकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। नीचे तक जाने के लिए उस वक्त पौनी वाले भी नहीं थे। सीआरपीएफ जवानों ने महफूज रास्ते से पर्यटकों को सड़क मार्ग तक पहुंचाया। क्यूएटी ने कई घायलों को नीचे तक लाने का इंतजाम किया। हालांकि खून ज्यादा बहने से एक घायल ने दम तोड़ दिया। बाकी दो घायलों को सुरक्षित तरीके से अस्पताल तक पहुंचा दिया गया।
सीओ राजेश कुमार और सहायक कमांडेंट राशि ने त्वरित गति से जवानों की मदद से कई पर्यटकों को बल के कैंप तक भेजा। वहां पर उन्हें प्राथमिक सहायता दी गई। पर्यटकों के खाने पीने का इंतजाम किया गया।
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जब सीआरपीएफ की क्यूएटी, लोगों को बचाने में जुटी थी, तब आर्मी और पुलिस भी वहां पहुंच गई। इसके बाद सभी बलों ने मिलकर घायलों को वहां से निकाला। उन्हें एसडीएच पहलगाम ले जाया गया। सूत्रों का कहना था कि सीआरपीएफ की क्यूएटी ने दूसरे बलों के आने का इंतजार नहीं किया। हालांकि कमांडेंट और ग्राउंड कमांडर को 'बैसरन' घाटी के जोखिम का अंदाजा नहीं था, लेकिन उन्होंने एक सेकंड का समय भी खराब नहीं किया। भले ही 'बैसरन' घाटी में आतंकी मौजूद हों, सीआरपीएफ 'क्यूएटी' आगे बढ़ती चली गई।