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नक्सलियों से लड़ते हुए CRPF कमांडेंट ने लिखी नक्सलवाद पर किताब, सुझाया खत्म करने का फार्मूला

Sat, 11 Jul 2020 07:45 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दंतेवाड़ा में तैनात 195वीं वाहिनी के कमांडेंट राकेश कुमार ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए जरुरी है कि पहले भय, भूख और भ्रष्टाचार का खात्मा किया जाए। इस पुस्तक से जो भी कमाई होगी, उसे प्रधानमंत्री राहत कोष एवं बल के महानिदेशक निधि कोष में दान किया जाएगा...
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CRPF DG AP Maheshwari - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल,'सीआरपीएफ' के कमांडेंट राकेश कुमार सिंह ने नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा में लंबे समय तक अपनी तैनाती के दौरान नक्सल समस्या पर एक पुस्तक लिख दी।

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सीआरपीएफ के डीजी डॉ. एपी महेश्वरी ने शुक्रवार को सिंह की पुस्तक 'नक्सलवाद-अनकहा सच' का विमोचन किया है। इस पुस्तक में केवल नक्सल समस्या पर ही बात नहीं हुई है, बल्कि उसे खत्म कैसे किया जा सकता है, यह फार्मूला भी सुझाया गया है।

दंतेवाड़ा में तैनात 195वीं वाहिनी के कमांडेंट राकेश कुमार ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए जरुरी है कि पहले भय, भूख और भ्रष्टाचार का खात्मा किया जाए। इस पुस्तक से जो भी कमाई होगी, उसे प्रधानमंत्री राहत कोष एवं बल के महानिदेशक निधि कोष में दान किया जाएगा।
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खास बात है कि राकेश कुमार ने यह पुस्तक कोरोना और लॉकडाउन की दुश्वारियों के बीच दंतेवाड़ा जैसे धुर नक्सल प्रभावित इलाके में अपनी ड्यूटी के दौरान लिखी है। यह पुस्तक नक्सलवाद की समस्या के समाधान को लेकर एक नया नजरिया प्रस्तुत करती है।

इसमें नक्सलवाद के कई अनकहे व अनछुए पहलुओं की गहराई से पड़ताल की गई है। राकेश सिंह बताते हैं कि डीजी एपी महेश्वरी ने कोरोना संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुए अपने कार्यालय से ही पुस्तक का ऑनलाइन विमोचन किया है।

वह बताते हैं कि मैंने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में छह साल तक ड्यूटी दी है। सीआरपीएफ, लोकल पुलिस या किसी दूसरे बल की वहां पर क्या भूमिका है, नक्सल को लेकर सरकार या जिला प्रशासन का कैसा रवैया है और सिविक एक्शन प्रोग्राम किस तरह से लोगों को इस समस्या से निजात दिलाने में मदद कर सकते हैं, आदि अनेक बिंदु इस पुस्तक में शामिल किए गए हैं।

नक्सलवाद की समस्या को परत दर परत खोलते हुए इसके हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की गई है। नक्सलवाद के जन्म से लेकर उसके क्रमिक प्रचार-प्रसार के बीच देश की बनती-बिगड़ती सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिदृश्यों की चर्चा भी इस पुस्तक में देखने को मिलेगी।

राकेश सिंह का मानना है कि नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें अनेक सार्थक व प्रभावी नीतियां बना रही हैं, किंतु भय, भूख और भ्रष्टाचार ऐसे कारक हैं, जो नक्सलवाद के लिए ईंधन का कार्य करते हैं।

इन शब्दों के जरिए नक्सलवाद को अच्छी तरह से समझा जा सकता है। सरकारों की मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति इस तथाकथित दुर्दांत आंदोलन को निष्प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त है। 

195वीं वाहिनी को बताया सर्वश्रेष्ठ बटालियन

पुस्तक के लेखक राकेश कुमार सिंह का छत्तीसगढ़ में कार्यकाल बहुत ही सफल एवं सराहनीय रहा है। उनके द्वारा अनेक उच्चस्तरीय सफल परिचालनिक अभियानों के साथ ही बस्तरवासियों के स्वास्थ सुधार एवं विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर जन जागरूकता अभियान भी चलाया गया है।

अपनी उत्कृष्टता के लिए सीआरपीएफ ने 195वीं वाहिनी को वर्ष 2019 की वामपंथी अतिवाद क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठ बटालियन के पुरस्कार से सम्मानित भी किया। साथ ही वर्षा जल संरक्षण, तालाबों की मरम्मत एवं नवनिर्माण तथा वृक्षारोपण हेतु भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय द्वारा 195वीं बटालियन को 'वाटर हीरो' की उपाधि से सम्मानित किया गया है।

नक्सलवाद के ऊपर लिखी गई राकेश कुमार सिंह की प्रथम पुस्तक 'नक्सलवाद और पुलिस की भूमिका' को गृह मंत्रालय के ’पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त’ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही पुलिस ट्रेनिंग एवं तनाव नियंत्रण पर लिखी गई उनकी पुस्तकें तमाम ट्रेनिंग सेंटरों में प्रचलित हैं।

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’एक घूंट चांदनी’ नाम से लिखा गया उनका उपन्यास प्रेम के नए आयाम को परिभाषित करता है। यह उपन्यास युवाओं में खासा लोकप्रिय है।

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