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सीआरपीएफ:  ढाई सौ ग्राम का मानवरहित हवाई वाहन बनेगा दुश्मनों का काल, बच नहीं सकेंगे पहाड़ों में छिपे आतंकी

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ड्रोन हमला (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' को जल्द ही ढाई सौ ग्राम का मानवरहित हवाई वाहन 'यूएवी' मुहैया कराया जाएगा। यह हवाई वाहन दुश्मनों का काल बनेगा। ऑपरेशन में लगी टीम को आतंकियों के छिपने के ठिकाने का लाइव वीडियो मिलेगा। इसकी मदद से जंगल, पहाड़, भवन और सुरंग में छिपे आतंकियों को बाहर निकाला जाएगा।

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ये खास यूएवी घने अंधेरे और बरसात में भी काम करेगा। इस वाहन की क्षमता 750 उड़ानों की है। हवाई वाहन, पांच मिनट से कम समय में टारगेट पर पहुंच सकता है और वापसी भी कर सकता है। 
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत सीआरपीएफ द्वारा कश्मीर घाटी और उत्तराखंड में उक्त 'मानवरहित हवाई वाहन' का ट्रायल किया जा रहा है। हवाई वाहन का इस्तेमाल उच्च जोखिम वाले परिचालन क्षेत्रों, जगलों और बिल्डिंग में छिपे आतंकियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए किया जाएगा। इस हवाई वाहन के द्वारा जम्मू-कश्मीर और उत्तर पूर्व में सुरंगों के भीतर की लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा। 
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बता दें कि सीआरपीएफ के पास मौजूदा ड्रोन सामान्य आकार के हैं। उनकी पे लोड क्षमता भी अधिक है। इनका इस्तेमाल भी आतंकी/नक्सली या उत्तर पूर्व के सर्च अभियानों में किया जाता है। कई ऑपरेशनों के दौरान बड़े यूएवी को गिरा भी दिया जाता है। इनकी आवाज भी ज्यादा रहती है और इन्हें दूर से पहचाना जा सकता है। 

अब सीआरपीएफ के लिए जिस 'मानवरहित हवाई वाहन' का ट्रायल किया जा रहा है, उसका आकार बहुत छोटा है। पेलोड सहित हवाई वाहन का अधिकतम वजन ढाई सौ ग्राम है। ज्यादा ऊंचाई पर इन्हें सामान्य आंखों से देखना संभव नहीं होगा। साथ ही इनकी आवाज भी बहुत कम रहती है। एक 'मानवरहित हवाई वाहन' साढ़े सात सौ से ज्यादा परिचालन उड़ानों के लिए सक्षम होगा। यह वाहन, माइनस पांच डिग्री तापमान में भी काम करेगा। इतना ही नहीं, तापमान अगर 50 डिग्री से ज्यादा है तो उड़ान के दौरान इस वाहन को दिक्कत नहीं आएगी। इसकी उड़ान के लिए अलग से कोई सिस्टम तैयार करने या तकनीकी स्टाफ लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसे फील्ड स्टाफ द्वारा आसानी से संचालित किया जा सकता है।

ये हैं 'मानवरहित हवाई वाहन' की खूबियां 
-जंगलों और दुर्गम स्थानों में आसान होगी सर्च
-उच्च-रिजॉल्यूशन वाले लाइव वीडिया और फोटो
-बड़े ऑपरेशनों में जोखिम रहित निर्णय लेने में मददगार
-जहां पर जवान नहीं जा सकते, वहां पहुंचेगा ये वाहन
-घुसपैठियों का पता लगाना आसान होगा
-सुरक्षित स्थान से दुश्मन की तैयारी का सटीक आकलन
-खतरनाक पदार्थों का पता लगाएंगे हाईटेक सेंसर

अस्थायी ऑपरेशन बेस पर लेंगे मदद 
'सीआरपीएफ' द्वारा जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों में 10 हजार फुट की ऊंचाई पर छिपे आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त किया जा रहा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद से लेकर अब तक सीआरपीएफ ने 55 से ज्यादा टेम्पोरेरी ऑपरेशन बेस ''टीओबी'' स्थापित किए हैं। पहले इतनी ऊंचाई पर सुरक्षा बलों की नियमित गश्त नहीं होती थी। नतीजा, आतंकवादी वहां पर छिपने का स्थान ढूंढ लेते थे। जुलाई 2025 के बाद से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीआरपीएफ ने ''टीओबी'' के जरिए आतंकियों को खदेड़ दिया है। आतंकियों को अपना ठिकाना छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। अब वहां पर मानवरहित हवाई वाहनों की मदद ली जाएगी। इसके अलावा उत्तर पूर्व, विशेषकर मणिपुर में भी इसके जरिए
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उग्रवादियों पर शिकंजा कसा जाएगा।

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