प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री की सर्वोच्च संस्था इंडियन न्यूज पेपर सोसायटी (आईएनएस) ने राफेल लड़ाकू विमान डील के बारे में ‘द हिंदू’ अखबार में प्रकाशित खबरों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की है। आईएनएस ने सरकारी गोपनीयता कानून (ओएसए) रद्द करने की भी मांग की।
संस्था की महासचिव मैरी पॉल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आईएनएस ने ‘द हिंदू’ के खिलाफ सरकारी गोपनीयता कानून के तहत कार्रवाई की कथित धमकी को लेकर स्तब्धता और नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट में राफेल पर सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल द्वारा दी गई धमकी अविवेकपूर्ण और लोकतंत्र में पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
संस्था ने सरकार और राजनीतिक दलों से इस कानून को रद्द करने के लिए एकजुट होने की अपील की है क्योंकि इसका सरकार के बारे में कड़वा सच प्रकाशित करने को लेकर मीडिया के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। बयान में कहा गया है कि इस कानून की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है, जहां शासन और प्रशासनिक निर्णय पर खबर प्रकाशित करने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है और यह संरक्षण सूत्र की गोपनीयता बनाए रखने के लिए भी है।
आईएनएस का यह बयान सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की उस दलील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिकाओं को इस आधार पर खारिज करने की मांग की थी कि ये रक्षा मंत्रालय से चोरी हुए दस्तावेज पर आधारित है। साथ ही, अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा था कि इस बारे में जांच की जा रही है।