भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन के कस्तूरीरंगन ने शनिवार को कहा कि संवर्धित सेटेलाइट प्रक्षेपण वाहनों की नाकामी के गंभीर विश्लेषण के साथ ही तकनीक और गुणवत्ता के मुद्दों के समाधान से पीएसएलवी और जीएसएलवी की मौजूदा पीढ़ी की सफलता का मार्ग साफ हो सका।
उन्होंने यह बात इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफारमेशन टेक्नोलॉजी, डिजाइन एंड मैन्यूफ्रैंक्चरिंग, कांचीपुरम के आठवें कन्वेंशन में नए स्नातकों को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि पहले दो संवर्धित सेटेलाइट प्रक्षेपण वाहन (एएसएलवी) की नाकामी के चलते इसरो में वैज्ञानिकों में शुरुआती हताशा की भावना खत्म हो गई थी क्योंकि हम अपनी सफलता के आड़े इस नाकामी को नहीं आने देना चाहते थे।
हमने समस्याओं का गंभीर विश्लेषण और गहराई से आकलन किया तथा तकनीक और गुणवत्ता के मुद्दों का समाधान निकाला जिससे ध्रुवीय सेटेलाइट प्रक्षेपण वाहन (पीएसएलवी) और भू-तुल्यकालिक सेटेलाइट प्रक्षेपण वाहन (जीएसएलवी) की मौजूदा पीढ़ी की सफलता का रास्ता साफ हुआ। इसरो की वेबसाइट के अनुसार, 1987 और 1988 में चार प्रक्षेपण किए गए। इनमें से एएसएलवी के दो मिशन नाकाम रहे।