पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजुमदार ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी विवाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि वह देश में सांप्रदायिक राजनीति को हवा देेने में असादुद्दीन ओवैसी से भी ज्यादा सक्रिय हैं।
मजुमदार ने आरोप लगाया कि ममता ने मुसलमानों को लुभाने के लिए मौलाना, मुज्जमिनों को पैसे देने की शुरुआत की। अब वह यही काम ईसाई समुदाय के साथ करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, ममता बनर्जी की यह आदत है कि वह हर मामले में केंद्र सरकार को घसीटती हैं और हर मामले को मजहबी रंग देने की कोशिश करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बनर्जी देश में अस्थिरता लाना चाहती हैं। जिससे पड़ोसी मुल्कों को फायदा होगा, जो हर समय यहां समस्याएं खड़ी करना चाहते हैं। उन्हें ऐसी आदतों से बाज आना चाहिए। ममता बनर्जी ने सोमवार को एक ट्वीट कर आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार की शह पर मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बैंक खाते सील कर दिए गए हैं।
कांग्रेस ने मंगलवार को मिशनरीज ऑफ चैरिटी के एफसीआरए पंजीकरण के नवीनीकरण से इनकार करने पर मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया और आरोप लगाया कि वह अपने बहुसंख्यकवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ईसाइयों को निशाना बना रही है।
अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने ट्विटर पर कहा, मदर टेरेसा और उनकी मिशनरीज ऑफ चैरिटी अल्पसंख्यकों के खिलाफ मोदी सरकार के दोषपूर्ण, प्रतिशोधी और घृणा से प्रेरित एजेंडे की नई शिकार है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि वर्ष 2021 के समापन के साथ, यह साफ है कि मोदी सरकार ने अपने बहुसंख्यकवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक और लक्ष्य ‘ईसाई’ पा लिया है। चिदंबरम ने गृह मंत्रालय से कहा कि वह, अपने शेरलॉक होम्स सरीखे कौशल का उपयोग सांप्रदायिक हिंसा और आतंकवादी गतिविधियों को कुचलने के लिए करे न कि ईसाई दान-पुण्य और मानवीय कार्यों को दबाने के लिए।