पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने कांग्रेस पार्टी के लिए खतरे की घंटे बजा दी है। अब 'कामचलाऊ' दुविधा का फैक्टर काम नहीं करेगा। 'त्रिकोण' यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का आखिरी सपना पूरा करने में जुटी कांग्रेस का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है।
पार्टी की हार के बाद हमेशा यही होता आया है कि कुछ लोग सच बोलने का प्रयास करते हैं, लेकिन वे 'कामचलाऊ' दुविधा का शिकार हो जाते हैं। कोई भी खुलकर और नियमित तौर पर सामने नहीं आ पाता। यह कहना है जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर एवं प्रख्यात राजनीतिक राजनीतिक विश्लेषक डॉ. आनंद कुमार का। डॉ. कुमार बताते हैं कि विपक्ष के ध्रुवीकरण का 'कांग्रेस मॉडल' अब वोटरों को लुभा नहीं रहा है।
वोटर, लंबे समय से देख रहा है कि कांग्रेस पार्टी अपने दम पर विपक्ष का चेहरा बनने में असफल साबित हुई है। 'त्रिकोण' में शामिल लोग न तो खुद ही फ्रंटफुट पर आगे आ रहे हैं और न किसी दूसरे को नेतृत्व का मौका प्रदान कर रहे हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी में कांग्रेस पार्टी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।
डॉ. आनंद कुमार कहते हैं कि राहुल गांधी ने गत लोकसभा चुनाव में जब अमेठी के अलावा केरल के वायनाड क्षेत्र से चुनाव लड़ा तो 'वॉकओवर' देने जैसी बात सामने आई। खासतौर पर यूपी एवं उत्तर भारत के दूसरे राज्यों में इस 'वॉकओवर' का असर देखने को मिला था। बाकी लोकसभा चुनाव के नतीजे सभी के सामने हैं।
बीच में कई बार ऐसे मौके आए, जब विपक्ष ने राहुल गांधी की तरफ देखा। उन्हें लेकर यह उम्मीद जताई कि वे मोदी के खिलाफ 'विपक्ष' की तरफ से लड़ सकते हैं। यह संभव नहीं हो सका और सब 'एकला चलो' की राह पर निकल पड़े। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव से पहले राहुल गांधी की ऐसी कोई रणनीति सामने नहीं आई, जिससे लोगों को यह लगता कि हां राहुल इस बार विपक्ष को साथ लेकर मोदी को घेरेंगे।
डॉ. आनंद कुमार के अनुसार, कांग्रेस पार्टी में बदलाव की आवाज तो उठती है, मगर वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती। पार्टी नेता 'कामचलाऊ' दुविधा का शिकार हो जाते हैं। वरिष्ठ नेता या युवा चेहरे खुलकर सामने नहीं आते। त्रिकोण का सपना है कि उन्हें 'हिन्दुस्तान की गद्दी' पर विराजमान होने का एक अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि बस उनके इसी आखिरी सपने को पूरा करने में कांग्रेस पार्टी लगी है। वैसे अब ममता बनर्जी केंद्रीय राजनीति में विपक्ष को साथ लेकर आगे बढ़ सकती हैं। अगले साल यूपी और पंजाब में चुनाव होने हैं, अगर कांग्रेस पार्टी यहां भी कुछ नहीं कर पाई तो 2024 में भी उसके लिए उम्मीद नहीं बचेगी।