निर्भया कांड के बाद देश के गुस्से को देखते हुए एक बार लोगों को लगा था कि शायद अब इस तरह की घटनाओं के प्रति शासन, प्रशासन और समाज की संवेदनशीलता बदलेगी और महिला अपराधों में कमी आएगी। लेकिन एनसीआरबी के आंकड़े बता रहे हैं कि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। चिंताजनक तथ्य यह है कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के मामलों में केस तो दर्ज हो जाते हैं, लेकिन इसका समय पर निबटारा नहीं हो पाता है। महिला विशेषज्ञों का मानना है कि केसों का सही समय से निबटान न हो पाना अपराधियों के हौंसले बुलंद करता है और इसी कारण इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है।
एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट (2019) के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली में 2019 में महिलाओं से अपराध के 57 हजार 601 मामले विचाराधीन थे। इनमें 48152 मामले पिछले वर्षों के थे, जबकि वर्ष 2019 में ही 9449 नए मामले कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए लाए गए। अकेले मुंबई महानगर में महिलाओं से अपराध के 23791 मामले विचाराधीन हैं। इनमें 19524 मामले पिछले वर्षों के हैं जबकि 4267 नए मामले सुनवाई के लिए लाए गए हैं।
वर्ष 2017 में देश में महिलाओं के साथ अपराध की कुल 3.60 लाख घटनाएं घटी थीं। वर्ष 2018 में यह संख्या बढ़कर 3.78 लाख तक पहुंच गई। वर्ष 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 4.6 लाख हो गया। 2019 के अपराधों में 286 मामले सामूहिक दुष्कर्म या दुष्कर्म के बाद हत्या के भी शामिल हैं। 2019 के कुल अपराधों में 32,260 मामले दुष्कर्म के शामिल हैं। इनमें 4940 दुष्कर्म नाबालिग लड़कियों के साथ किए गए थे।
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में वर्ष 2013 में महिलाओं के साथ दुष्कर्म की 1636 घटनाएं घटी थीं। वर्ष 2019 में ये घटनाएं बढ़कर 2168 तक पहुंच गईं। जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक 2199 तक पहुंच गया था। इस वर्ष कोरोना काल के कारण दुष्कर्म की घटनाओं में कुछ कमी दिख रही है। पिछले वर्ष (15 अगस्त तक) दुष्कर्म की 1402 घटनाएं घटी थी। इस वर्ष यह आंकड़ा 908 दर्ज किया गया है।
महिलाओं के अपहरण की घटनाओं में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013 में महिलाओं के अपहरण की 3286 घटनाएं दर्ज की गई थीं। 2015 में यह आंकड़ा बढ़कर 3738 तक पहुंच गया था। वर्ष 2019 में महिलाओं के अपहरण की 3471 घटनाएं दर्ज की गई थीं। ससुराल पक्ष के लोगों के द्वारा दहेज उत्पीड़न के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2013 में महिलाओं के साथ ससुराल पक्ष के लोगों के द्वारा दहेज के लिए उत्पीड़न के 3045 मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है और 2019 में यह बढ़कर 3792 तक पहुंच चुका है।
महिला कल्याण के क्षेत्र में कार्य कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि इन अपराधों के मामले मेंं देरी से सुनवाई अपराधों के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। अगर इस तरह के मामलों के अपराधियों को अधिकतम छह महीने में उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सके तो इस तरह के अपराधों को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए कानून में उचित बदलाव किए जाने चाहिए।