गृह मंत्रालय 2020 से भारत में ऑटोमेटेड फेशियल रिक्गनिशन सिस्टम (एएफआरएस) शुरू करने जा रहा है। इसकी सहायता से न केवल अपराधियों को पकड़ा जा सकेगा, बल्कि लापता बच्चों व नागरिकों की पहचान आसान होगी। इस सिस्टम को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो लागू करेगा और इसे क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के तहत चलाया जाएगा।
एएफआरएस सॉफ्टवेयर उन लोगों को कवर करेगा जो सीसीटीएनएस डाटाबेस में शामिल हैं। इसमें आरोपी, कैदी, लापता या लावारिस लोग विशेषकर बच्चे और अज्ञात शवों की जानकारी होती है। इस डेटाबेस को कुछ ही एजेंसियां उपयोग कर सकती हैं। इसमें नागरिकों की निजता का ध्यान रखा जाता है।
फिलहाल अपराधी या लापता लोगों की तस्वीर सीसीटीएनएस डेटा से मिलाई जाती है। इसमें समय लगता है और गलती की आशंका रहती है। जबकि एफआरएस के जरिए फोटो का ‘इलेक्ट्रॉनिक मिलान’ हो सकेगा। इसमें समय कम लगेगा और पहचान भी ज्यादा सटीक होगी।
चेहरे की पहचान
एएफआरएस में चेहरे के फीचर्स से पहचान की जाती है। इसकी सटीकता 97 प्रतिशत मानी गई है। इस तकनीक में चेहरे के 30 हजार तक बिंदुओं का मिलान हो सकता है।
फैक्टस
7.71 लाख लापता नागरिकों की सूचनाएं सीसीटीएनएस में
98 हजार बच्चे भी शामिल हैं इनमें