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अवमानना मामला: SC ने प्रशांत भूषण पर लगाया एक रुपये का जुर्माना, राजीव धवन ने दिया पैसा

Mon, 31 Aug 2020 02:43 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजीव धवन ने जुर्माना भरने के लिए भूषण को एक रुपया का सिक्का दिया - फोटो : PTI
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उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में सोमवार को उनपर एक रुपये का जुर्माना लगाया। इसी बीच वरिष्ठ अभिभाषक राजीव धवन ने जुर्माना भरने के लिए भूषण को एक रुपया का सिक्का दिया। फैसले को लेकर वरिष्ठ वकील का कहना है कि वे आज शाम को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कांफ्रेंस करेंगे और अपने अगले कदम के बारे में भी बताएंगे।

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अदालत ने लगाया एक रुपये का जुर्माना
उच्चतम न्यायालय ने प्रशांत भूषण पर सोमवार को एक रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि यदि वह इसे 15 सितंबर तक जमा नहीं कराते हैं तो उन्हें तीन महीने की जेल और तीन साल तक प्रैक्टिस करने से रोक दिया जाएगा। यह फैसला न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया। न्यायालय ने कहा, 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता, लेकिन दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान किए जाने की आवश्यकता है।'
 

इससे पहले अदालत ने 25 अगस्त को उनकी सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। प्रशांत भूषण को सजा सुनाने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से राय मांगी थी। जिस पर वेणुगोपाल ने कहा था कि प्रशांत भूषण को चेतावनी देकर छोड़ देना चाहिए। बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक दो ट्वीट के लिए सर्वोच्च न्यायालय से माफी मांगने से इनकार कर दिया था। 
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यह भी पढ़ें- Prashant Bhushan Case: सुप्रीम कोर्ट ने भूषण के खिलाफ 2009 के अवमानना मामले को दूसरी पीठ को भेजा

25 अगस्त को अदालत ने सुरक्षित रख लिया था फैसला 
शीर्ष अदालत 25 अगस्त को वकील प्रशांत भूषण से उनके द्वारा उच्चतम न्यायालय और न्यायाधीशों के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर माफी मंगवाने में सफल नहीं हो सका था। अदालत  ने बीते मंगलवार को अवमानना में दोषी ठहराए गए भूषण की सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए अफसोस जताया कि जजों की निंदा की जाती है। उनके परिवारवालों को अपमानित किया जाता है और वह बोल तक नहीं सकते।

क्या है पूरा मामला
22 जून को वरिष्ठ वकील ने अदालत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे और चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद 27 जून के ट्वीट में प्रशांत भूषण ने सर्वोच्च न्यायालय के छह साल के कामकाज को लेकर टिप्पणी की थी। इन ट्वीट्स पर स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी।
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अदालत ने उन्हें नोटिस भेजा था। इसके जवाब में भूषण ने कहा था कि सीजेआई की आलोचना करना उच्चतम न्यायालय की गरिमा को कम नहीं करता है। उन्होंने कहा था कि पूर्व सीजेआई को लेकर किए गए ट्वीट के पीछे मेरी एक सोच है, जो बेशक अप्रिय लगे लेकिन अवमानना नहीं है।

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