ओडिशा के बालासोर में एक कॉलेज छात्रा की आत्मदाह से मौत मामले की जांच कर रही पुलिस की अपराध शाखा को गवाहों के बयानों में विसंगतियां मिली हैं। अपराध शाखा ने रविवार को कहा कि मामले की गहराई से जांच में समय लगेगा। अपराध शाखा ने यह भी कहा कि 20 साल की छात्रा ने खुद को आग इसलिए लगाई, क्योंकि कॉलेज की आंतरिक जांच समिति ने उसकी यौन शोषण की शिकायत को सही नहीं माना।
अपराध शाखा के महानिदेशक विनयतोष मिश्रा ने बालासोर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा,
'कॉलेज प्रशासन ने उसकी शिकायत पर कार्रवाई की थी और एक आंतरिक जांच की गई थी। लेकिन आंतरिक जांच दल ने उसकी शिकायत को मान्य नहीं किया। उसका यह कदम उसकी शिकायत को मान्य न किए जाने की प्रतिक्रियास्वरूप उठाया गया।'
12 जुलाई को छात्रा ने किया था आत्मदाह
गौरतलब है कि यह मामला फकीर मोहन (स्वायत्त) महाविद्यालय की एकीकृत बीएड विभागाध्यक्ष समीरा कुमार साहू के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत से जुड़ा है, जिसकी जांच अब अपराध शाखा की महिला और बाल अपराध शाखा कर रही है। छात्रा ने 12 जुलाई को आत्मदाह कर लिया था और 14 जुलाई की रात उसकी मौत हो गई। इस घटना से पूरे देश में गुस्सा फैल गया। 17 जुलाई को बालासोर की जिला पुलिस से जांच का जिम्मा लेकर अपराध शाखा ने केस की जांच शुरू की।
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गवाहों के बयानों में मिली विसंगतियां: महानिदेशक
अपराध शाखा के महानिदेशक मिश्रा ने कहा कि हमें आंतरिक शिकायत समिति और पुलिस को दिए गए गवाहों के बयानों और सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट में विसंगतियां मिली हैं। उन्होंने घटना से पहले और बाद में अलग-अलग विचार और राय दी हैं। प्रत्येक बयान का गहन विश्लेषण आवश्यक है, और इसमें समय लगेगा। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उचित विश्लेषण आवश्यक है।
साहू और घोष को पुलिस ने किया गिरफ्तार
महानिदेशक ने भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और किसी भी निर्दोष को सजा नहीं दी जाएगी। साथ ही, सरकार भी इस मामले को गंभीरता से ले रही है। इस बीच, कॉलेज के दो लोग- विभागाध्यक्ष साहू और कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल दिलीप घोष को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
मामले में अपराध शाखा को कई अहम सुराग मिले: महानिदेशक
महानिदेशक मिश्रा ने कहा कि अपराध शाखा को इस घटना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी लोगों की पहचान करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब तक अपराध शाखा ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूत जुटाए हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज के स्टाफ और जांच समिति के सदस्यों के बयान भी लिए जा रहे हैं। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी ने छात्रा को आत्मदाह के लिए उकसाया था। मिश्रा ने कहा, 'हमें इस मामले में कई अहम सुराग मिले हैं और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पीड़िता को न्याय मिले।'
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यूजीसी और उच्च शिक्षा विभाग की टीम भी कर रही मामले की जांच
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल के जवाब में महानिदेशक मिश्रा ने बताया कि छात्रा ने पुलिस में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी, लेकिन कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने इस मुद्दे पर पुलिस अफसरों को एक बैठक के लिए बुलाया था। एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच न सिर्फ अपराध शाखा कर रही है, बल्कि यूजीसी (UGC) की एक टीम और ओडिशा सरकार की उच्च शिक्षा विभाग की एक टीम भी अलग-अलग जांच कर रही हैं।
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