1948 में स्वतंत्रता मिलने के बाद इनदिनों श्रीलंका भारी आर्थिक संकट से गुजर रहा है। इस संकट से उबरने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने श्रीलंका सरकार को हरसंभव मदद करने का भरोसा दिया है। श्रीलंका सरकार ने कहा है कि दिवालिया देश के लिए आईएमएफ से अति आवश्यक राहत पाने के लिए द्वीपीय देश के कर्जदाताओं का सहयोग महत्वपूर्ण होगा।
इससे पहले एक सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने घोषणा की कि वह श्रीलंका को चार साल में लगभग 2.9 बिलियन अमरीकी डालर का कर्ज देगा, ताकि देश को आर्थिक उथल-पुथल से उबरने में मदद मिल सके।
बेलआउट पैकेज से देश की क्रेडिट रेटिंग और अंतरराष्ट्रीय लेनदारों और निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। लेनदारों के साथ एक ऑनलाइन जुड़ाव में सरकार ने शुक्रवार को कहा कि आईएमएफ बोर्ड द्वारा कार्यक्रम को अपनाने के लिए एक शर्त के रूप में द्विपक्षीय लेनदारों से आश्वासन आवश्यक है। दिसंबर के मध्य तक इसके मूर्त रूप लेने की उम्मीद है। आईएमएफ उन देशों को उधार नहीं देता है जिनके ऋण को टिकाऊ नहीं माना जाता है, जिसके लिए श्रीलंका को अग्रिम व्यापक ऋण उपचार की आवश्यकता होती है।
अंतर्राष्ट्रीय ऋण डिफ़ॉल्ट की घोषणा
अप्रैल के मध्य में, विदेशी मुद्रा संकट के कारण श्रीलंका ने अपने अंतर्राष्ट्रीय ऋण डिफ़ॉल्ट की घोषणा की। देश पर 51 बिलियन अमरीकी डालर का विदेशी ऋण बकाया है, जिसमें से 28 बिलियन अमरीकी डालर का 2027 तक भुगतान किया जाना चाहिए।
13 अगस्त को राजपक्षे ने छोड़ा था देश
आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका के लोगों प्रदर्शन की वजह से गोतबाया राजपक्षे को देश छोड़न पड़ा था। हालांकि, 52 दिनों तक विदेशों में रहने के बाद गोतबाया श्रीलंका वापस लौटे थे। गोतबाया मालदीव के रास्ते सिंगापुर पहुंचे और फिर कुछ दिन थाईलैंड में बिताए। वह थाईलैंड भाग जाने के लगभग दो महीने बाद लौटे है। पूर्व राष्ट्रपति 11 अगस्त को श्रीलंका सरकार के अनुरोध पर थाईलैंड पहुंचे थे। 13 अगस्त को राजपक्षे ने देश छोड़ दिया था। उधर 21 जुलाई को रानिल विक्रमसिंघे ने 21 जुलाई को संसद में श्रीलंका के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी।