पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) ने खालिस्तान समर्थकों और गैंगस्टरों का एक नेटवर्क बनाया था। इसका मकसद खालिस्तान आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाना था। योजना यह थी कि यह नेटवर्क नशीले पदार्थों (ड्रग्स), हथियार और गोलियों की तस्करी करे और खालिस्तान नेटवर्क के लिए पैसे जुटाए।
इससे अब तक खालिस्तान समर्थकों और गैंगस्टर नेटवर्क दोनों को फायदा मिल रहा था। लेकिन अब इस गठजोड़ में दरार पड़ती दिख रही है। इसकी एक वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कनाडा और ब्रिटेन के साथ संबंधों में सुधार हुआ है।
कनाडा और ब्रिटेन ने खालिस्तानी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। साथ ही भारत, कनाडा और ब्रिटेन की एजेंसियों के बीच तालमेल भी बेहतर हुआ है। इसके कारण अब रणनीति में बदलाव देखा जा रहा है। जो खालिस्तानी समर्थक कई वर्षों से ब्रिटेन और कनाडा में रहकर भारत के खिलाफ अभियान चला रहे थे, उन्हें अब लगने लगा है कि उनकी आक्रामक और हिंसक रणनीति काम नहीं कर रही है।
'खत्म हो रहा लोगों के मन से डर'
एक अधिकारी ने बताया कि खालिस्तानी समर्थकों ने हमेशा भारत के खिलाफ हिंसक रुख अपनाया। इसमें भारतीय मूल के लोगों को धमकाना, कभी-कभी वहां के स्थानीय लोगों को भी डराना, भारत विरोधी प्रचार करना और मंदिरों की बेअदबी (अपमान) जैसी घटनाएं शामिल थीं। अधिकारी ने कहा, अब एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और लगातार कार्रवाई के कारण लोगों के मन से डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
क्या रणनीति बदलने पर मजबूर हुए खालिस्तानी?
एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि अब खालिस्तान समर्थकों ने नई रणनीति अपनाई है। वे अब शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं और धीरे-धीरे लोगों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे लोगों को यह समझाना चाहते हैं कि उनके अनुसार यह आंदोलन क्यों जरूरी है। अधिकारी ने कहा, इन लोगों ने तय किया है कि अब वे हिंसा नहीं करेंगे। वे नरम तरीका अपनाएंगे, ताकि लोगों को डराने के बजाय उन्हें अपनी बात समझा सकें।
खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव गैंगस्टरों के नेटवर्क को पसंद नहीं आ रहा है। गैंगस्टर नेटवर्क की ताकत हिंसा और डर पर टिकी होती है। उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा जबरन वसूली से आता है। अधिकारी ने कहा, कनाडा में इस नेटवर्क ने भारतीय मूल के लोगों की इमारतों और कारोबार पर गोलियां चलाईं। इसका मकसद लोगों में डर पैदा करना और उनसे पैसे वसूलना था।
'हिंसक रुख खालिस्तानियों का सबसे बड़ा हथियार'
अधिकारी ने बताया कि गैंगस्टर नेटवर्क के लिए नरम रुख ठीक नहीं है, क्योंकि उनका सबसे बड़ा हथियार हमेशा डर रहा है। इसलिए खालिस्तानी समर्थकों के इस फैसले का गैंगस्टरों ने विरोध किया है। अधिकारियों के मुताबिक, इसी वजह से दोनों के बीच मतभेद बढ़ गए हैं।
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कमजोर पड़ेंगी खालिस्तानियों की अहिंसक छवि बनाने की कोशिशें
आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआई के समर्थन वाले खालिस्तानी समर्थक अब मुश्किल स्थिति में हैं। यह किसी से छिपा नहीं है कि खालिस्तानी नेटवर्क और गैंगस्टर नेटवर्क साथ मिलकर काम करते हैं। इसलिए अगर गैंगस्टर कोई हिंसक घटना करते हैं, तो उसका संबंध सीधे खालिस्तान आंदोलन से जोड़ दिया जाएगा। इससे खालिस्तानी समर्थकों की अहिंसक छवि बनाने की कोशिश कमजोर पड़ जाएगी।
दूसरी तरफ, खालिस्तानी समर्थक गैंगस्टर नेटवर्क से पूरी तरह रिश्ता भी नहीं तोड़ सकते। क्योंकि हथियार और गोलियां हासिल करने में गैंगस्टर नेटवर्क उनकी मदद करता है। वहीं ड्रग्स की तस्करी से मिलने वाला पैसा भी इस आंदोलन के लिए अहम माना जाता है।