सुप्रीम कोर्ट में चार वरिष्ठ जजों के प्रेस कांफ्रेंस से मचे घमासान के बीच मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ संसद के बजट सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि इस संबंध में फिलहाल विपक्षी दलों के साथ विचार विमर्श जारी है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों दिए गए एक साक्षात्कार में सियासी दलों से न्यायपालिका के इस विवाद से दूर रहने की सलाह दी थी।
येचुरी ने कहा कि ऐसा लगता है कि चार वरिष्ठ जजों द्वारा उठाए गए सवाल के बाद न्यायपालिका का मुद्दा अभी सुलझा नहीं है। ऐसे में समय की मांग है कि इस मुद्दे पर कार्यपालिका हस्तक्षेप करे।
यह शीर्ष न्यायालय की समस्या का समाधान निकालने के लिए विधायिका को अपनी भूमिका निभाने का समय है। हम विपक्षी दलों से संसद के बजट सत्र के दौन मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने जाने की संभावना पर विचार विमर्श कर रहे हैं। अगर सहमति बनी तो आगामी सत्र में इस आशय का प्रस्ताव संसद में लाया जा सकता है।
पीएम मोदी ने बीते दिनों एक अंग्रजी चैनल को दिए साक्षात्कार में इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी थी। उन्होंने न्यायपालिका के इस विवाद से सियासी दलों को दूर रहने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के जज बेहद समझदार होते हैं। वे मिल बैठक कर इस विवाद का समाधान निकाल सकते हैं।
गौरतलब है कि दो हफ्ते पूर्व सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस जोसेफ कुरियन, जस्टिस रंजन गोगोगी और जस्टिस मदन बी लोकुर ने वर्तमान मुख्य न्यायाधीश मिश्रा पर संगीन आरोप लगाए थे।
इन जजों के विभिन्न मामलों को पीठ को सौंपे जाने के तौर तरीकों पर सवाल उठाए थे। जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को सुरक्षित रखे बिना लोकतंत्र को नहीं बचाया जा सकता।
गौरतलब है कि
चीफ जस्टिस के बाद
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम चार न्यायाधीशों जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने 12 जनवरी को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार हुआ।
जस्टिस जे चेलमेश्वर ने कहा था कि, 'हम चारों इस बात पर सहमत हैं कि इस संस्थान को बचाया नहीं गया तो इस देश में या किसी भी देश में लोकतंत्र जिंदा नहीं रह पाएगा। स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका अच्छे लोकतंत्र की निशानी है। चूंकि हमारे सभी प्रयास बेकार हो गए, यहां तक कि आज सुबह भी हम चारों ने चीफ जस्टिस से मुलाकात की, उनसे आग्रह किया। लेकिन हम अपनी बात पर उन्हें सहमत नहीं करा सके। इसके बाद हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा कि हम देश को बताएं कि न्यायपालिका की देखभाल करें।
जस्टिस जे चेलमेश्वर ने कहा कि, 'मैं नहीं चाहता कि 20 साल बाद इस देश का कोई बुद्धिमान व्यक्ति यह कहे कि चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ ने अपनी आत्मा बेच दी।'
हालांकि बाद में जस्टिस गोगोई और जोसेफ ने आशा जताई थी कि संकट का समाधान जल्द निकल जाएगा। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने समाधान की दिशा में पहल की थी। दिल्ली की सभी जिला बार एसोसिएशन ने बैठक कर इस मुद्दे पर गंभीर प्रतिक्रियाएं दी और सुप्रीम कोर्ट में जारी गतिरोध के जल्द समाधान की उम्मीद जताई थी।