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जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने की इजाजत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे माकपा नेता

Wed, 02 Dec 2020 04:35 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
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माकपा नेता मोहम्मत यूसुफ तरीगामी (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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जम्मू-कश्मीर में देश के किसी भी नागरिक को जमीन खरीदने की इजाजत दिए जाने के खिलाफ बुजुर्ग माकपा नेता मोहम्मत यूसुफ तरीगामी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। तरीगामी ने अपनी याचिका में शीर्ष अदालत से मामले में हस्तक्षेप करने और याचिका पर सुनवाई होने तक केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस आदेश को स्थगित करने की गुहार लगाई है।

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संविधान के अनुच्छेद-32 (मौलिक अधिकारों का उल्लंघन) के तहत दाखिल याचिका में गृह मंत्रालय की अक्तूबर में जारी अधिसूचना को अवैध बताया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह अधिसूचना अगस्त, 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के अनुसरण में जारी की गई है, जिसे पहले ही कई लोगों ने चुनौती दे रखी है और शीर्ष अदालत भी इस मामले से पूरी तरह वाकिफ है।


याचिकाकर्ता के मुताबिक, नए कानून में हालांकि कृषि भूमि की बिक्री किसी गैर कृषक को करने पर प्रतिबंध है, लेकिन यह कानून किसी कृषक को अपनी जमीन बिक्री, तोहफे, विनिमय या बंधक रखने के माध्यम से एक गैर कृषक को हस्तांतरित करने की इजाजत देने के लिए सरकार या उसके अधिकारी को अधिकृत करता है।
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कुलगाम से चार बार के विधायक तरीगामी ने अपील की है कि भू उपयोग में बदलाव को जिला अधिकारी या उससे निचले स्तर की नौकरशाही की मनमानी पर नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि निरस्त किए गए कानूनों में इसे रोकने के लिए मौजूद बाधाओं और संतुलन को नए कानून में शामिल किया जाना चाहिए।

पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद-370 और अनुच्छेद-35ए के निरस्तीकरण से पहले जम्मू-कश्मीर की नागरिकता नहीं रखने वाला व्यक्ति वहां कोई अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता था। लेकिन ताजा बदलावों ने इस केंद्र शासित प्रदेश से बाहर के लोगों के लिए जमीन खरीदने की राह खोल दी है। गृह मंत्रालय की तरफ से संशोधित कानून की अधिसूचना जारी होने के बाद जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के राजनीतिक दल बेहद गुस्से में दिखाई दिए थे। उन्होंने इसे केंद्र सरकार का जम्मू-कश्मीर को बेचने के लिए पेश करने वाला कदम बताया था।

नष्ट हो जाएगी जम्मू-कश्मीर की खाद्य सुरक्षा
तरीगामी ने अपनी याचिका में कहा है कि कानून में किए गए संशोधन से जम्मू-कश्मीर के भू-उपयोग पैटर्न में गंभीर बदलाव आएगा और यहां की खाद्य सुरक्षा नष्ट हो जाएगी। उनके मुताबिक, पूर्ववर्ती राज्य सरकारों के भूमि कानूनों का लक्ष्य बड़े पैमाने पर कृषि भूमि को व्यवसायीकरण से बचाना था, जो जम्मू-कश्मीर के लोगों को जीवन देती है।

क्या है गृह मंत्रालय की अधिसूचना में?
केंद्र सरकार ने कृषि भूमि प्रबंधन से जुड़े जम्मू-कश्मीर भूराजस्व अधिनियम, 1996 और जम्मू-कश्मीर डेवलपमेंट एक्ट, 1970 की कई धाराओं में संशोधन किया था। डेवलपमेंट एक्ट की धारा-17 से केंद्र सरकार ने ‘राज्य का स्थायी नागरिक’ वाक्य हटा दिया है। इस कानून का उपयोग क्षेत्रीय विकास योजनाओं में भवनों, सड़कों, आवासीय कॉलोनियों, उद्योगों, व्यापारों, बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक व निजी खुले स्थानों का भू-उपयोग निर्धारित करने में होता है। इन बदलावों को लागू करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 111 पेज की अधिसूचना जारी की है।

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