भारतीय राजनीति में तीसरे मोर्चे की कल्पना को कम्युनिस्ट पार्टी ने नकार दिया है। पार्टी का कहना है कि ऐसा कोई मोर्चा कभी बन ही नहीं सकता। पार्टी का कहना है कि भाजपा बेहतर तरीके से जानती है कि एनडीए 2024 में लोकसभा चुनाव हार जाएगी।
नूंह हिंसा के लिए भाजपा-आरएसएस को ठहराया जिम्मेदार
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता बिनॉय विश्वम ने रविवार को एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि हरियाणा जिले के नूंह में हुई झड़प भाजपा और उसके वैचारिक माता-पिता आरएसएस ने ही करवाई थी। उन्होंने कहा कि यह बात को जनता भी समझती है कि हरियाणा के नूंह में जो भी कुछ हुआ वह, भाजपा और आएसएस की साजिश थी। उन्होंने सिर्फ अल्पसंख्यक समाज की आजीविका को ही नहीं बल्कि हर समुदाय की आजीविका को नुकसान पहुंचाया। गुंडों और अपराधियों ने दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हमला किया। भाजपा सरकार के कारण हिंसा और झड़पें राजनीतिक हो गईं।
तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को किया खारिज
इसके अलावा, विश्वम ने तीसरे मोर्चे की संभावना को भी नकार दिया है। दरअसल, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना सीएम और बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में तीसरे मोर्चे का प्रस्ताव रखा था, जिस पर विश्वम ने कहा कि कोई तीसरा मोर्चा नहीं हो सकता। 2024 लोकसभा चुनाव की लड़ाई एनडीए और इंडिया मोर्चे के बीच ही होगी। उन्होंने कहा कि तीसरा मोर्चा कुछ नहीं है बल्कि भाजपा का ही एक दल है, जो बाहर से भाजपा की सहायता करेगा। भाजपा यह अच्छे से जानती इस लोकसभा चुनाव में वह हार रही है।
भाजपा-जेडीएस गठबंधन को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
कर्नाटक में भाजपा और जेडी (एस) के साथ आने को लेकर विश्वम ने कहा कि पार्टी प्रमुख एचडी देवेगौड़ा के अलावा किसी और ने भाजपा के साथ गठबंधन की बात नहीं की। देवेगौड़ा तो भाजपा की जयजयकार कर रहे हैं। यह काफी निराशा जनक है कि इतने बड़े कद का नेता राजनीतिक जीवन के इस पड़ाव पर भाजपा में शामिल होने का फैसला कर रहा है। भाजपा और जेडी (एस) का गठबंधन एक दुखद घटनाक्रम है। इसी सिलसिले में हाल ही में देवेगौड़ा के नेतृत्व में पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी के आवास पर बैठक भी हुई थी।
सीपीआई नेता ने बताई आजादी की कहानी
वहीं, सीपीआई महासचिव डी राजा ने एक कार्यक्रम के समापन सत्र में कहा कि कम्युनिस्टों की वीरतापूर्ण भूमिका के बिना कोई भी आधुनिक भारत और तेलंगाना का इतिहास लिख ही नहीं सकता। भाजपा सहित बीआरएस भी अलग-अलग नामों से हैदराबाद विलय दिवस के उत्सव का आयोजन कर रही है, जिसकी डी राजा ने आलोचना की। उन्होंने कहा कि हैदराबाद विलय में भाजपा की क्या भूमिका थी। भाजपा का नाम पहले जनसंघ था और जनसंघ का संरक्षक आरएसएस था तो उनकी हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम में क्या भूमिका था। जब कम्युनिस्ट सबसे आगे खड़े हुए वैसे ही स्वतंत्रता आंदोलन जन आंदोलन बन सका था। देश की आजादी में कम्युनिस्ट पार्टी ने अहम भूमिका निभाई है।