सुरवरम सुधाकर रेड्डी दो बार सांसद रहे और 12वीं (1998-1999) और 14वीं (2004-2009) लोकसभा में नलगोंडा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। संसद में अपने कार्यकाल के दौरान वे श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय, किसानों और हाशिए के समुदायों के कल्याण के मुखर समर्थक रहे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सुरवरम सुधाकर रेड्डी का शुक्रवार रात 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वामपंथी राजनीति में एक कद्दावर हस्ती रेड्डी का हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों का इलाज चल रहा था।
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राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा
तेलंगाना के महबूबनगर जिले के कोंड्रावपल्ली गांव में 25 मार्च, 1942 को जन्मे सुरवरम सुधाकर रेड्डी का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा। उन्होंने अपने शुरुआती दौर में ही राजनीति में प्रवेश कर लिया था। वे वामपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित थे। उन्होंने छात्र आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने मात्र 15 वर्ष की आयु में कुरनूल के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के लिए एक आंदोलन का नेतृत्व किया था।
सरकारी भ्रष्टाचार को उजागर करने के प्रयासों के लिए चर्चित
सुरवरम सुधाकर रेड्डी दो बार सांसद रहे और 12वीं (1998-1999) और 14वीं (2004-2009) लोकसभा में नलगोंडा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। संसद में अपने कार्यकाल के दौरान वे श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय, किसानों और हाशिए के समुदायों के कल्याण के मुखर समर्थक रहे। उन्हें सरकारी भ्रष्टाचार को उजागर करने के अपने प्रयासों के लिए भी जाना जाता था।
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परिवार में पत्नी और दो पुत्र
2012 से 2019 तक उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के रूप में कार्य किया। इस पद पर वे तीन कार्यकाल तक रहे। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वे कई जन संघर्षों में अग्रणी रहे। वे अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और सरल, सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे। रेड्डी के परिवार में उनकी पत्नी डॉ. बीवी विजया लक्ष्मी और उनके दो पुत्र हैं।
ए. रेवंत रेड्डी और के. चंद्रशेखर राव ने जताया दुख
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और बीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव सहित अन्य लोगों ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने भारतीय राजनीति और समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान को श्रद्धांजलि दी।