अटल जी का अस्थिकलश राजस्थान पहुँच चुका हैं। इसे चंबल नदी, पुष्कर सरोवर और बेनेश्व संगम( सोन,माही और जाखड) में प्रवाहित करने की योजना है। शाम को तीन बजे सीएम वसुंधरा राजे अस्थियों को पुष्कर सरोवर में प्रवाहित करेंगी। इसके लिए जोर-शोर से तैयारी चल रही है।
अस्थि विसर्जन या....?
राम कुमार मीणा आीईटी प्रोफेशनल हैं। अटल जी उनके लिए आदरणीय हैं। मीणा अलवर से चलकर अस्थि कलश पर अपना आदर देने आए हैं, लेकिन उन्हें भी लग रहा है कि अस्थिकलश के बहाने बहुत ज्यादा हो रहा है। सरकारें महान नेता की मृत्यु पर वोट बैंक की राजनीति कर रही है।
सतीश पेशे से होटल में कर्मचारी हैं। उन्हें भी अटल बिहारी वाजपेयी अच्छे लगते है। हॉस्पिटैल्टी मैनेजमेंट करके आए सतीश का कहना है कि अब तो हर कोई अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहता है। मार्केटिंग दौर है। सतीश टिप्पणी भी करते हैं कि राजनीतिक दलों में सबने उठाया। कांग्रेस ने भी इंदिरा, राजीव की असामयिक मृत्यु के बाद एेसा किया था। लेकिन राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग के अफसर इसे गलत मानते हैं। उनका कहना है सब जनता के पैसे की बर्बादी है। इसकी जगह प्रार्थना सभा, श्रद्धांजलि सभा ज्यादा ठीक है। उसमें नेताओं के भाषण कम हों।
जयपुर में भामाशाह टेक्नोहब उद्घाटन में भाग लेने आई वंशिका अटल जी से बहुत प्रभावित हैं। वंशिका के मुताबिक परमाणु परीक्षण न हुए होते तो भारत आर्थर उन्नति भी नहीं कर पाता। अमेरिका, चीन जैसे देश अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर भारत की रफ्तार धीमी कर देते। वंशिका का कहना है प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन अटल जी की मृत्यु के बाद यह शोक का समय है। एेसी दु:खद घड़ी में अस्थिकलश यात्र और यात्रा के दौरान का वातावरण अच्छा नहीं कहा जाएगा।