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'अस्थिकलश यात्रा पर करोड़ों खर्च करने की बजाय ऐसे देते श्रद्धांजलि तो अटल जी को मिलती शांति'

Fri, 24 Aug 2018 12:56 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीपीआई नेता ने पूर्व पीएम वाजपेयी की अस्थिकलश यात्रा और केरल बाढ़ पीड़ितों को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर उठाए सवाल।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थिकलश यात्रा पर केंद्र सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन अगर वह इन रुपयों को केरल के बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी बचाने के लिए खर्च करती तो अटल बिहारी वाजपेयी की आत्मा को केंद्र सरकार और भाजपा की तरफ से सच्ची श्रद्धांजलि होती। यह कहना है सीपीआई नेता अतुल कुमार अंजान का। 

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अंजान ने कहा कि केरल के बाढ़ पीड़ितों को यूएई सरकार ने 700 करोड़ रुपये की मदद देने का प्रस्ताव दिया था। यह राशि खुद केंद्र सरकार की केरल को दी गई मदद से भी ज्यादा होती। लेकिन केंद्र सरकार ने अपने दंभ में यूएई की मदद लेने से इनकार कर दिया। क्या गुजरात भूकंप के दौरान उन्हें किसी तरह की मदद लेने से किसी के द्वारा रोका गया था।

उन्होंने कहा कि किसी भी जगह किसी प्राकृतिक आपदा के आने पर पूरा विश्व मदद के लिए साथ आ खड़ा होता है। यही मानवीय गुण है जो हमें ऐसे समय में करना चाहिए। लेकिन ऐसे समय में मदद को इनकार करना केवल अहंकार दिखाता है, जो यह सरकार दिखा रही है। 
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अंजान के मुताबिक केरल के लोगों का जीवन बाढ़ के कारण दस साल पीछे चला गया है। केरल के साठ फीसद से ज्यादा ग्रामीण मकान और अधिकांश कृषि भूमि खराब हो गई है। केरल की अर्थव्यवस्था का मूल स्रोत नारियल के पेड़ तबाह हो चुके हैं, इलायची और कालीमिर्च जैसे मसालों की खेती खराब हो चुकी है।

इस त्रासदी से उबरने में केरल को लंबा समय लगने वाला है। ऐसे समय में किसी पूर्वाग्रह को छोड़कर सबको केरल की मदद के लिए आगे आना चाहिए, न कि किसी पूर्वाग्रह के कारण जनता को कष्ट देना चाहिए। अंजान ने कहा कि केरल की बाढ़ को राजनीतिक चश्मे से देखने की जरुरत नहीं है।

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अटल जी की अस्थियों का चंबल, पुष्कर और बेनेश्वर में विसर्जन

अटल जी का अस्थिकलश राजस्थान पहुँच चुका हैं। इसे चंबल नदी, पुष्कर सरोवर और बेनेश्व संगम( सोन,माही और जाखड) में प्रवाहित करने की योजना है। शाम को तीन बजे सीएम वसुंधरा राजे अस्थियों को पुष्कर सरोवर में प्रवाहित करेंगी। इसके लिए जोर-शोर से तैयारी चल रही है। 

अस्थि विसर्जन या....?
राम कुमार मीणा आीईटी प्रोफेशनल हैं। अटल जी उनके लिए आदरणीय हैं। मीणा अलवर से चलकर अस्थि कलश पर अपना आदर देने आए हैं, लेकिन उन्हें भी लग रहा है कि अस्थिकलश के बहाने बहुत ज्यादा हो रहा है। सरकारें महान नेता की मृत्यु पर वोट बैंक की राजनीति कर रही है।

सतीश पेशे से होटल में कर्मचारी हैं। उन्हें भी अटल बिहारी वाजपेयी अच्छे लगते है। हॉस्पिटैल्टी मैनेजमेंट करके आए सतीश का कहना है कि अब तो हर कोई अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहता है। मार्केटिंग दौर है। सतीश टिप्पणी भी करते हैं कि राजनीतिक दलों में सबने उठाया। कांग्रेस ने भी इंदिरा, राजीव की असामयिक मृत्यु के बाद एेसा किया था। लेकिन राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग के अफसर इसे गलत मानते हैं। उनका कहना है सब जनता के पैसे की बर्बादी है। इसकी जगह प्रार्थना सभा, श्रद्धांजलि सभा ज्यादा ठीक है। उसमें नेताओं के भाषण कम हों।

जयपुर में भामाशाह टेक्नोहब उद्घाटन में भाग लेने आई वंशिका अटल जी से बहुत प्रभावित हैं। वंशिका के मुताबिक परमाणु परीक्षण न हुए होते तो भारत आर्थर उन्नति भी नहीं कर पाता। अमेरिका, चीन जैसे देश अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर भारत की रफ्तार धीमी कर देते। वंशिका का कहना है प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन अटल जी की मृत्यु के बाद यह शोक का समय है। एेसी दु:खद घड़ी में अस्थिकलश यात्र और यात्रा के दौरान का वातावरण अच्छा नहीं कहा जाएगा।
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