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ISRO POEM-4: लोबिया के अंकुरित बीजों में निकली पहली पत्तियां, इसरो ने बताया- अंतरिक्ष में ऐतिहासिक कामयाबी

Mon, 06 Jan 2025 10:12 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की तरफ से विकसित 'कॉम्पैक्ट रिसर्च मॉड्यूल फॉर ऑर्बिटल प्लांट स्टडीज' (सीआरओपीएस) एक स्वचालित मंच है, जिसे अंतरिक्ष के सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण वातावरण में पौधों के जीवन को विकसित करने और बनाये रखने के लिए डिजाइन किया गया है।
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लोबिया के अंकुरित बीजों में निकली पहली पत्तियां - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को कहा कि 'पीएसएलवी-सी60 पीओईएम-4 प्लेटफॉर्म' पर अंतरिक्ष में भेजे गए लोबिया के बीजों में अंकुरण के बाद पहली पत्तियां निकल आयी हैं। इसरो ने कहा कि यह अंतरिक्ष आधारित पौध अनुसंधान में एक मील का पत्थर है।
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जानें क्या है इसरो का क्रॉप?
भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की तरफ से विकसित 'कॉम्पैक्ट रिसर्च मॉड्यूल फॉर ऑर्बिटल प्लांट स्टडीज' (सीआरओपीएस) एक स्वचालित मंच है, जिसे अंतरिक्ष के सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण वातावरण में पौधों के जीवन को विकसित करने और बनाये रखने के लिए डिजाइन किया गया है। इसरो ने कहा कि उसके हालिया प्रयोगों में से एक में सक्रिय तापीय प्रबंधन से सुसज्जित नियंत्रित और बंद वातावरण में लोबिया के बीज उगाना शामिल था। इसरो ने बताया कि इस प्रणाली ने ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर, सापेक्ष आर्द्रता, तापमान और मिट्टी की नमी समेत कई मापदंडों की निगरानी की, साथ ही पौधों की वृद्धि पर नजर रखने के लिए तस्वीरें भी लीं।

अंतरिक्ष में पौधे उगाने की इसरो की क्षमता
अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, इस प्रणाली ने अंतरिक्ष में लोबिया के अंकुरण और दो पत्ती वाली अवस्था तक विकास को सफलतापूर्वक सहायता प्रदान की। इसरो ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'यह उपलब्धि न केवल अंतरिक्ष में पौधे उगाने की इसरो की क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि भविष्य के दीर्घकालिक मिशन के लिए मूल्यवान जानकारी भी प्रदान करती है।'
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इसरो ने कहा कि पौधे सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल कैसे ढलते हैं, यह समझना जीवन समर्थन प्रणाली विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है जो अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भोजन का उत्पादन कर सकती है और हवा और पानी बना सकती है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, 'सीआरओपीएस प्रयोग की सफलता अंतरिक्ष में स्थायी मानव मौजूदगी की दिशा में एक आशाजनक कदम है।'
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