अभी तक हमारे सामने जो आंकड़े हैं उनके आधार पर यह कहना थोड़ा कठिन है कि चुनाव के दौरान संक्रमण के मामले बढ़े ही हैं। कुछ देशों में चुनाव के कुछ सप्ताह के बाद कोविड-19 के नए मामलों में की संख्या में उछाल देखी गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे प्रतिबंधों में ढील और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए अन्य कार्य भी कारण हो सकते हैं।
बेलारूस में चुनाव के विरोध में कई प्रदर्शन हुए थे। सर्बिया में भी चुनाव के बाद कई विरोध प्रदर्शन हुए थे। सर्बिया पर आरोप है कि चुनावों को देखते हुए उसने अपने यहां के कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या कम बताई थी। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया है, जिसके कोविड प्रबंधन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। अप्रैल में यहां चुनाव हुआ था, और इस संबंध में कोविड-19 का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मतदान स्थलों पर संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके लिए चुनाव अधिकारी सख्ती से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, मास्क अनिवार्य किया जाए, सैनिटाइजेशन का उचित प्रबंध किया जाए। इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स की वरिष्ठ शोधार्थी फर्नांडा ब्यूरिल कहती हैं कि मतदान के विभिन्न तरीकों को अपना कर भी खतरा कम किया जा सकता है।