पूरे साल 2020 के दौरान पूरी दुनिया कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में रही। अभी भी कई देशों में इसका प्रकोप जारी है। हालांकि, इस महामारी की कई वैक्सीन भी अब आ गई हैं और कई देशों में टीकाकरण का काम शुरू भी हो गया है। वहीं, वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को लेकर वैक्सीन निर्माता कंपनियां इसकी जवाबदेही लेने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसके चलते कई देशों में टीकाकरण का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
ऐसे में सवाल यह है कि अगर वैक्सीन के जानलेवा या गंभीर दुष्प्रभाव सामने आते हैं तो इसके लिए कंपनी जिम्मेदार होगी या सरकारें। भारत की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंरनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कंपनी को इस जिम्मेदारी से अलग रखने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि पिछली महामारियों के समय में वैक्सीन के दुष्प्रभाव को लेकर अलग-अलग नियम बनाए जाते रहे हैं।
फाइजर नहीं लेना चाहती इसकी जिम्मेदारी
दुनिया में सबसे पहले कोरोना की वैक्सीन पेश करने वाली कंपनी फाइजर और पेरू सरकार के बीच एक करोड़ वैक्सीन का सौदा अभी तक पूरा नहीं हो पाया। इसके पीछे का कारण यह है कि कंपनी ने इस सौदे में वैधानिक बचान (लीगल इम्यूनिटी) का प्रावधान किया है। ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो भी सवाल उठा चुके हैं कि फाइजर इसकी जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती है। उधर, अर्जेंटीना ने भी कुछ ऐसी ही चिंता जताई है।
'दान' में मिलने वाली वैक्सीन पर भी समस्या
उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ (ईयू) ने कोरोना वायरस की वैक्सीन की कमी से परेशान गरीब देशों को पांच फीसदी वैक्सीन की खुरादें उपलब्ध कराने की बात कही है। ऐसे में दान में मिली वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स की जिम्मेदारी तय करना खासा मुळ्किल होगा। यह समस्या उन देशों के सामने भी है, जो कंपनियों से सीधे वैक्सीन की खरीद कर रहे हैं, क्योंकि कंपनियां सीधे तौर पर इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हैं।