जांच के लिए नमूने लेता स्वास्थ्य कर्मी (फाइल फोटो)
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अब आरटी-पीसीआर जांच के सैंपल के रखरखाव को लेकर अधिक चिंता नहीं होगी क्योंकि वैज्ञानिकों ने टीई बफर तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सैंपल को ड्राई तरीके से लैब तक पहुंचाने का विकल्प निकाला है।
अभी नाक और गले से लिए सैंपल को वीटीएम उपकरण से लैब ले जाया जाता है। थोड़ी लापरवाही या तापमान चार डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा होने पर सैंपल बेकार हो सकता है। अब सैंपल को ड्राई तकनीक से भेजने पर यह चिंता खत्म होगी और परिणाम भी 96 फीसदी से अधिक बेहतर मिलेगा। हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि सैंपल खराब होने पर संक्रमित व्यक्ति भी कई बार निगेटिव मिल जाता है या फिर सैंपल के आरएनए अलग करने में मुश्किल होती है। नई जांच किट तैयार करने के लिए हेल्थ सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से करार हुआ है।
जांच रिपोर्ट में आधा लगेगा समय
डॉ. मिश्रा ने बताया कि अभी वीटीएम के इस्तेमाल से एक सैंपल को लेकर जांच करने तक की प्रक्रिया में कम से कम पांच से छह घंटे लगते हैं। इसपर सरकार को कम से कम 1200 से 1300 रुपये तक का खर्च आता है। लेकिन ड्राई तकनीक का इस्तेमाल करें तो दो से तीन घंटे में ही रिपोर्ट मिल सकती है और खर्चा भी 400 से 500 रुपये के बीच रहेगी।
40 मरीजों पर किया गया अध्ययन
सिंकदराबाद के गांधी मेडिकल कॉलेज में 40 मरीजों से दो तरह के सैंपल लिए गए। पहले 14 मरीजों और इसके बाद 26 के सैंपल की जांच की गई। 14 में से 9 पॉजिटिव मिले थे जबकि पांच निगेटिव मिले। टीई बफर तकनीक से कम समय में आरएनए को अलग करते हुए संक्रमण की जल्दी पुष्टि हुई।
जांच की रफ्तार दोगुनी होगी, अगले माह से मिलेगी
ड्राई तकनीक से जांच दोगुनी तेजी से होगी। वैज्ञानिकों के अनुसार दो से तीन घंटे में ही यह तकनीक 50 हजार सैंपल की जांच कर सकती है। अगले माह से यह किट आरटी-पीसीआर जांच के लिए उपलब्ध होगी।