सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 महामारी पर अंकुश तक देश में सारी स्वास्थ्य सुविधाओं व संबंधित इकाइयों के राष्ट्रीयकरण के निर्देश देने संबंधी याचिका खारिज कर दी। जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस रवींद्र भट की बैंच ने याचिका के सुझावाें को ‘मिथ्या विचार’ करार दिया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कहा, ऐसी मांग न व्यावहारिक है, न सुने जाने योग्य। इस पर जस्टिस भूषण ने याचिकाकर्ता से पूछा, इस तरह का आदेश कैसे दे सकते हैं? याचिकाकर्ता ने कहा, उनका उद्देश्य मरीजों को बेहतर उपचार मुहैया कराना है।
कोर्ट चाहे, तो केंद्र को आदेश जारी कर सकता है। जस्टिस भूषण ने कहा, वह सभी निजी अस्पतालों के राष्ट्रीयकरण का आदेश नहीं दे सकते। बता दें कि सरकार ने पहले ही कोरोना मरीजों के उपचार के लिए कुछ अस्पतालों को नियंत्रण में लिया हुआ है।