अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी इस पर अध्ययन कर चुका है जिसमें यह साबित हुआ है कि इंसान की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में यह काफी कारगर है। टास्क फोर्स के सदस्य व आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीएचयू से आवेदन प्राप्त हुआ है। जल्द ही इसकी मंजूरी दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि पीएमओ के निर्देश मिलने के बाद आयुर्वेद वैज्ञानिकों से प्रस्ताव मांगे गए थे। भारत सरकार की फॉर्माकोपिया समिति के पूर्व सदस्य व बीएचयू के विभागाध्यक्ष डॉ. केएन द्विवेदी ने बताया कि अभी तक वायरस पर आयुर्वेद का ट्रायल पहली बार भारत प्रयोग करने जा रहा है।
आयुर्वेदिक एंटीबॉयोटिक के रूप में जाना जाने वाला फीफाट्रोल 13 जड़ी बूटियों से तैयार एक एंटी माइकोबियल फाॅर्मूला है जिसमें शामिल पांच प्रमुख बूटियों में सुदर्शन वटी, संजीवनी वटी, गोदांती भस्म, त्रिपुवन कीर्ति रस और मत्युंजय रस शामिल हैं। जबकि आठ औषधियों के अंश मिलाए गए हैं जिनमें तुलसी, कुटकी, चिरायता, मोथा गिलोय, दारुहल्दी, करंज व अप्पामार्ग शामिल हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार आयुर्वेद और एनआईवी के अलावा भी कई मेडिकल रिसर्च कॉलेज व संस्थाएं कोरोना को लेकर शोध कर रही हैं। इस समय छह भारतीय कंपनियां पहला कोविड वैक्सीन तैयार करने में जुटी हैं। इनमें भारत बॉयोटेक, इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स लिमिटेड, मायन्वेक्स, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, जाइडस कैडिला, बॉयोलॉजिकल ई लिमिटेड शामिल हैं। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का भी कहना है कि दुनिया में वैक्सीन निर्माण को लेकर भारत सबसे बड़ा केंद्र है।
बीएचयू के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कमल नयन द्विवेदी ने बताया कि डेंगू के मरीजों को जब फीफाट्रोल दी गई तो महज तीन दिन में ही मरीजों में प्लेटलेट्स दोगुनी हो गईं। इतना ही नहीं अध्ययन में यह भी साबित हो चुका है कि कमजोर लिवर को भी यह ताकतवर बनाता है।