देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस के ज्यादा मामले वाले जिलों में अस्पतालों में संक्रमण रोकने के लिए उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे डॉक्टरों, नर्सों समेत स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है। सूत्रों ने कोरोना प्रभावित राज्यों में तैयारियों का जायजा लेने वाली केंद्रीय टीमों के हवाले से यह दावा किया है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इन केंद्रीय टीमों को ऐेसे जिलों में तैयारियों की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया था जहां कोरोना वायरस के ज्यादा मामले सामने आए हैं। सूत्रों ने बताया कि टीमों ने देखा कि नमूने लिए जाने के दौरान और कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के इलाज में संक्रमण के रोकथाम उपायों को तय मानकों के मुताबिक ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने और कोरोना वायरस के मामलों में और बढ़ोतरी होने की आशंका बढ़ जाती है।
टीमों ने सिफारिश की है कि संक्रमण पर रोकथाम के लिए दिशानिर्देशों का अस्पतालों में सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। साथ ही ज्यादा संक्रमण वाले जोन में घर-घर सर्वे और निगरानी के लिए ज्यादा स्टाफ रखे जाने की भी सिफारिश की गई है, ताकि कोई भी केस बचकर जाने न पाए। दरअसल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों के स्वास्थ्य विभागों की सहायता और समीक्षा के लिए छह उच्चस्तरीय टीमों का गठन किया था।
- यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में टीमों ने किया था दौरा
इन टीमों में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एससीडीसी), एम्स और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) आईसीएमआर के विशेषज्ञ शामिल हैं। इन टीमों ने गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में अप्रैल के दूसरे और तीसरे सप्ताह दौरा किया था।
देश भर में डॉक्टरों और नर्सों सहित अनेक स्वास्थ्य कर्मी कोविड-19 से संक्रमित हो गए हैं। संक्रमित स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर एक अधिकारी ने बताया कि ऐसा कोई केंद्रीकृत आंकड़ा नहीं रखा गया है।
- केंद्रीय टीमों की अन्य सिफारिशें...अस्पतालों में भी तीन श्रेणियां बनें
अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए मामूली, साधारण और गंभीर मरीजों की तीन श्रेणियां बननी चाहिए। इन्हें अस्पताल में अलग-अलग वार्ड में रखा जाना चाहिए, ताकि संक्रमण में तेजी से इजाफा न हो। स्वास्थ्यकर्मियों को ट्रेनिंग दी जाए और मामूली, साधारण और गंभीर मरीजों का इलाज राष्ट्रीय चिकित्सकीय दिशानिर्देशों के मुताबिक होना चाहिए।