विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना वायरस की वैक्सीन को तैयार करने के लिए दुनियाभर में 170 से ज्यादा जगहों पर प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि इनमें से कई वैक्सीन अभी प्री-क्लिनिकल दौर में है लेकिन दुनिया की नजरें उन प्रयासों पर टिकी हैं जहां तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है।
इस समय दुनिया जानलेवा बीमारी कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने और उसे हराने के लिए तत्पर है लेकिन कई प्रमुख दवा डेवलेपर्स ने तब तक सरकार से मंजूरी ना लेने की फैसला किया है, जब तक उनकी वैक्सीन सुरक्षित साबित ना हो जाए। इस कदम को एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के कई देशों पर वैक्सीन बनाने का राजनैतिक दबाव है।
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन दुनिया के हर देश के लिए उपलब्ध करानी होगी। वैश्विक रिकवरी मापदंडों से एक भी देश के बाहर रहने का मतलब होगा कि दुनिया अभी भी कोरोना वायरस संकट का सामना कर सकती है।
कोरोना वायरस से अब तक दुनिया में 8,70,000 लोग मारे जा चुके हैं और ढाई करोड़ से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट मे हैं। आइए जानते हैं कि कोरोना वैक्सीन को लेकर मौजूदा समय में कहां-कहां शोध जारी है और वह किस स्तर पर है...
भारत में कोरोना वैक्सीन
भारत में फिलहाल कोरोना की तीन वैक्सीन पर काम चल रहा है, सरकारी सूत्रों के मुताबिक देश की दो वैक्सीन की परीक्षण दूसरे चरण में है जबकि एक वैक्सीन का परीक्षण अपने तीसरे और आखिरी चरण में है। देश की पहली स्वदेशी कोरोना वैक्सीन, भारत बायोटेक-आईसीएमआर की ओर से विकसित कोवाक्सिन (Covaxin) का परीक्षण दूसरे चरण में है।
वहीं देश की दूसरी स्वदेशी वैक्सीन जायडस कैडिला की जाइकोव-डी (Zykov-D) का परीक्षण भी दूसरे चरण में है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन पहले से ही तीसरे और आखिरी चरण के ट्रायल में है।
रूस की वैक्सीन 'स्पुतनिक-वी'
रूस ने अपनी वैक्सीन की दौड़ को जारी रखा है क्योंकि वैक्सीन के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक दिखाई दिए हैं। रूस की वैक्सीन स्पुतनिक-वी को दो छोटे परीक्षणों में टेस्ट किया गया है। इन परीक्षणों में 18-60 उम्र के 38 स्वस्थ लोगों पर टेस्ट किया गया।
पहली डोज के 21 दिन बाद इन लोगों को दूसरी डोज दी गई और 42 दिनों तक इनपर निगरानी रखी गई। सभी उम्मीदवारों ने तीन हफ्तों में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित कर ली।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैक्सीन प्रोजेक्ट ChAdOx1 में स्वीडन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका भी शामिल है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविड वैक्सीन के ट्रायल का काम दुनिया के अलग-अलग देशों में चल रहा है। इंग्लैंड में अप्रैल के दौरान इस वैक्सीन प्रोजेक्ट के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल का काम एक साथ पूरा किया गया।
अगर अंतिम चरण के नतीजे भी सकारात्मक रहे, तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम साल के आखिर तक ब्रिटेन की नियामक संस्था 'मेडिसिंस एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी' (एमएचआरए) के पास रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करेगी।
अमेरिका की मॉडर्ना कोरोना वैक्सीन
मॉडर्ना के क्लीनिकल ट्रायल में अमेरीका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) भी शामिल है। एनआईएच के निदेशक फ्रांसिस कोलिंस का कहना है कि साल 2020 के आखिर तक कोरोना की वैक्सीन बना लेने का लक्ष्य रखा गया है। नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ और मॉडर्ना इंक में डॉ. फाउची के सहकर्मियों ने इस वैक्सीन को विकसित किया है।
27 जुलाई से इस वैक्सीन का सबसे अहम पड़ाव शुरू हो चुका है। तीस हजार लोगों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है और पता किया जाएगा कि क्या ये वैक्सीन वाकई कोविड-19 से मानव शरीर को बचा सकती है।
चीन की कोरोना वैक्सीन CoronaVac
चीन की निजी फार्मा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक जिस कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, वो ट्रायल के तीसरे और आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड के बाद परीक्षण के अंतिम चरण में पहुंचने वाली ये दुनिया की तीसरी वैक्सीन है। इस वैक्सीन का ब्राजील में नौ हजार वॉलिंटियर्स पर परीक्षण चल रहा है।
अमेरिका और जर्मनी की साझा वैक्सीन BNT162b2
अमेरिकी फार्मा कंपनी 'फाइजर' और जर्मन कंपनी 'बॉयोएनटेक' मिलकर एक कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट BNT162b2 पर काम कर रही हैं। दोनों कंपनियों ने एक साझा बयान जारी कर बताया है कि वैक्सीन प्रोजेक्ट इंसानों पर परीक्षण के आखिरी चरण में पहुंच गई है।
अगर ये परीक्षण सफल रहे, तो अक्तूबर के आखिर तक वे सरकारी मंजूरी के लिए आवेदन दे सकेंगे। कंपनी की योजना साल 2020 के आखिर तक वैक्सीन की 10 करोड़ और साल 2021 के आखिर तक 1.3 अरब खुराक की आपूर्ति सुनिश्चित करने की है।
जापान में भी वैक्सीन पर शोध
जापानी की मेडिकल स्टार्टअप एंजेस ने कहा है कि उसने कोरोना वायरस की संभावित वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण शुरू कर दिया है। जापान में इस तरह का यह पहला परीक्षण है, कंपनी ने कहा है कि ओसाका सिटी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में अगले साल 31 जुलाई तक परीक्षण जारी रहेंगे।