देश में कोरोना का कहर खतरनाक रफ्तार से फैल रहा है, वहीं केंद्र सरकार और स्वास्थ्य विभाग का जोर कोरोना के वैक्सीनेशन अभियान पर ज्यादा है। हालांकि देश के कई राज्यों में वैक्सीन की कमी होने की वजह से वैक्सीनेशन केंद्रों के बंद होने की शिकायतें आई हैं।
ये शिकायतें उस समय आ रही हैं, जब वैक्सीन की खुराकें और तेजी से लोगों तक पहुंचानी है। ऐसे संकेत मिले हैं कि भारत में वैक्सीन का प्रोडक्शन कुछ और हफ्तों के लिए सीमित हो सकता है। जबकि सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की ओर से वैक्सीन बनाने की क्षमता को बढ़ाने की उम्मीद है।
अगले महीने से सीरम इंस्टीट्यूट अपनी क्षमता को और बढ़ाएगा। मौजूदा समय में सीरम की मासिक क्षमता 60-70 मिलियन खुराकें हैं, जिसे बढ़ाकर 100 मिलियन तक करने की उम्मीद है। हालांकि सीरम इंस्टीट्यूट ने अब तक घरेलू इस्तेमाल के लिए 100 मिलियन खुराकें डिलिवर कर दी हैं।
इसी के साथ भारत बायोटेक भी अपनी क्षमता को दोगुना करने जा रही है। मौजूदा समय में भारत बायोटेक दो लाख खुराकें बनाती हैं लेकिन अगले महीने तक कंपनी अपनी क्षमता को बढ़ाकर पांच लाख खुराकें कर देगी। कंपनी के फाउंडर कृष्णा ईला का कहना है कि जुलाई-अगस्त तक कंपनी 150 मिलियन खुराकें बनानी की उम्मीद है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि जल्द ही स्पुतनिक वी को भी अप्रूवल मिलने की संभावना है। ऐसे में वैक्सीन की सप्लाई में आसानी हो जाएगी। हालांकि अभी वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। भारत में रूसी कंपनी स्पुतनिक वी वैक्सीन की 850 मिलियन डोज तैयार करेगी। इसके अलावा आने वाले कुछ महीनों में कोरोना की दूसरी वैक्सीन पर भी काम किया जाएगा।