डिसइंफेक्शन टनल से निकालता एक शख्स।
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कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए कीटाणुरहित सुरंगों (डिसइंफेक्टेड टनल) में लोगों पर होने वाले रासायनिक छिड़काव पर प्रतिबंध लग सकता है। केंद्र सरकार मंगलवार को इस संबंध में निर्देश जारी कर सकती है। शीर्ष अदालत विधि छात्र गुरसिमरन सिंह नरूला द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में डिसइंफेक्टेड सुरंगों पर प्रतिबंध लगाने की गुहार लगाई गई है।
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम आर शाह की पीठ के समक्ष सोमवार को केंद्र सरकार ने बताया, कार्य स्थलों व सार्वजनिक स्थलों पर कीटाणुनाशक टनल लगाने और इनके इस्तेमाल को लेकर कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किए हैं।
सरकार ने कहा है कि मनुष्यों पर रासायनिक छिड़काव सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इस पर पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, अगर यह हानिकारक है तो आप प्रतिबंध क्यों नहीं लगा देते। जवाब में मेहता ने कहा कि मंगलवार तक इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी होने की संभावना है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा है कि कीटाणुनाशक सुरंगों के इस्तेमाल, विभिन्न रसायन के इस्तेमाल, छिड़काव और इससे पड़ने वाले प्रभावों को लेकर नौ जून को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति की बैठक हुई थी।
मंत्रालय ने कहा है कि सुरंगों, कैबिनेट और चैंबर के जरिये लोगों पर रासायनिक छिड़काव की सिफारिश नहीं की गई है क्योंकि इससे संक्रमित व्यक्ति द्वारा वायरस फैलाने की क्षमता कम नहीं हो जाती।