देश जहां कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बीमार मरीजों को ले जाने के लिए मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। मुंबई में एक कोरोना संक्रमित महिला को अस्पताल तक जाने के लिए एंबुलेंस सर्विस को 24 हजार रुपये चुकाने पड़े।
वर्ली कोलीवाडा की रहने वाली 55 वर्षीय कोविड-19 पॉजिटिव महिला से नौ मई को अस्पताल पहुंचाने की एवज में 24,000 रुपये वसूले गए। सबसे पहले, महिला से वर्ली से पवई ले जाने के लिए 12,000 रुपये लिए गए। फिर पवई अस्पताल में बिस्तर नहीं मिलने पर बायकुला के मसिना अस्पताल ले जाने के लिए उससे 12,000 रुपये लिए गए। कुछ अन्य मरीजों ने भी एंबुलेंस ऑपरेटरों को लेकर इस तरह की शिकायत की।
संक्रमित महिला के बेटे ने कहा कि वे (एंबुलेंस सेवा) शुल्क को कम करने के लिए कह रहे थे। इसके बजाय इसे बढ़ाते रहे। हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं था। इसलिए मजबूरन हमें उनके द्वारा तय किए गए शुल्क में जाना पड़ा। ये लोग रोगियों का लाभ उठा रहे हैं क्योंकि लॉकडाउन के दौरान कोई अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं है। ”
जबकि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने अपनी हेल्पलाइन 1916 पर कोविड रोगियों के लिए एक मुफ्त एंबुलेंस सेवा भी शामिल की है। वहीं, कुछ लोगों ने शिकायत की कि हेल्पलाइन पर कॉल करने के बावजूद एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई।
ऐसे ही कुर्ला में एक अन्य कोविड-19 मरीज को एंबुलेंस सर्विस का किराया चुकाने के लिए कर्ज लेना पड़ा। कुर्ला के रहने वाले 43 वर्षीय व्यक्ति से कुर्ला से कांदिवली की यात्रा की एवज में 13,000 रुपये वसूले गए।
उसने बताया कि जब मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो मैंने बीएमसी की हेल्पलाइन को फोन मिलाया और इस तरह मुझे कांदिवली अस्पताल में एक बेड दिया गया है। बीएमसी ने एंबुलेंस को लेकर मेरी कोई मदद नहीं की। संक्रमित व्यक्ति ने कहा कि वह इतने ज्यादा पैसों को चुकाने में सक्षम नही है, इसलिए उसे मजबूरन निजी एंबुलेंस सर्विस को 13,000 रुपये चुकाने पड़े।
वहीं, इन मामलों पर बीएमसी अधिकारियों ने कहा कि नागरिकों को इस तरह की आपात परिस्थितियों में स्थानीय पुलिस स्टेशन और स्थानीय वार्ड कार्यालय के साथ संपर्क में रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय वार्ड कार्यालय में नियंत्रण कक्ष पहले से ही एंबुलेंस और ऐसे अन्य मुद्दों को लेकर लोगों की मदद कर रहे हैं।