निहालगढ़ रेलवे स्टेशन में परिचालन विभाग से जुड़े सूत्र की माने तो राजधानी, शताब्दी, पैसेंजर ट्रेन से ज्यादा मांग लोकोमोटिव, डेमू ट्रेनों की है। सूत्र बताते हैं कि कम पैसे में यात्रा के कारण के कारण रोजमर्रा के कामकाजी लोगों को इसके न चलने से काफी परेशानी हो रही है। बनारस रेलवे स्टेशन के प्रमुख सूत्र का भी कहना है कि जौनपुर-बनारस-सुल्तानपुर जैसी ट्रेनों की काफी मांग है। हर दिन रेलवे का स्टाफ इन ट्रेनों के परिचालन की जानकारी देते-देते थक जाता है। सूत्र बताते हैं कि कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए अभी इन ट्रेनों के परिचालन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।
अभी रेलवे बोर्ड कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव शनिवार को एक रूपरेखा के साथ प्रेसवार्ता में आए, लेकिन अभी यात्री ट्रेनों को चलाने को लेकर उनके पास भी कोई ठोस जवाब नहीं था। रेलवे बोर्ड चेयरमैन का कहना है कि अधिकारी यात्री ट्रेनों के परिचालन के लिए राज्य सरकारों से संपर्क कर रहे हैं। समझा जा रहा है कि कोविड-19 की स्थिति और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर रेलवे बोर्ड ट्रेनों के परिचालन के मामले में काफी फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। नादर्न रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यात्री ट्रेनों के परिचालन का दबाव है, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी लोगों की सुरक्षा है। सूत्र का कहना है कि रेलवे का देश की अर्थ व्यवस्था और कारोबार में प्रत्याक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काफी बड़ा योगदान रहता है, लेकिन स्थितियों को देखते हुए अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
गौरतलब है कि रेलवे 13523 से अधिक यात्री ट्रेनों का परिचालन करता है। इसमें हर दिन करीब 8.5 अरब लोग यात्रा करते हैं। 12,147 के करीब लोकोमोटिव ट्रेन चलती है और पूरे देश में 7231 रेलवे स्टेशनों को रेलवे जोड़ता है। इस तरह से जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश को जोडऩे वाला रेल नेटवर्क देश के आर्थिक विकास में काफी बड़ा योगदान करता है। कोविड के चलते यह सब प्रभावित हुआ है।