दुनियाभर में कोरोनावायरस महामारी का प्रकोप जारी है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में तो अब तक कोरोना की चौथी-पांचवीं लहर तक आ चुकी है। हालांकि, कई और देशों में कोरोना के रोजाना के मामले काफी कम हैं और इन देशों में आम जीवन भी कोरोना से पहले के समय पर लौट रहा है। ऐसे में हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कोरोना महामारी के अंत पर फैसला कैसे होगा और इससे जुड़ा फैसला पूरी दुनिया के लिए कौन लेगा?
क्या हैं इन सवालों के जवाब?
वैज्ञानिकों की मानें तो किसी महामारी की शुरुआत और अंत को लेकर कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है और किसी वैश्विक महामारी का खतरा हर देश के लिए अलग-अलग हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आपात व्यवस्थाओं के प्रमुख डॉक्टर माइकल रायन के मुताबिक, किसी महामारी का पर फैसला सिर्फ उसके आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्तिपरक फैसला है। यह किसी महामारी की गंभीरता और उसके प्रभाव पर भी निर्भर करता है।
जनवरी 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोनावायरस को वैश्विक स्वास्थ्य संकट करार दिया था। डब्ल्यूएचओ ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का मसला भी बताया था। इसके दो महीने बाद यानी मार्च में संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने कोरोना संकट को महामारी (Pandemic) की श्रेणी में रखा था। डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि यह वायरस अब तक लगभग हर महाद्वीप तक फैल चुका है। कई और स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी पुष्टि की थी कि कोरोना अब महामारी का रूप ले चुका है।
कौन करेगा कोरोना महामारी के खत्म होने का फैसला?
कोरोना महामारी के खत्म होने का पूरी तरह खत्म होने का फैसला आखिरी तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से ही किया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब भी अधिकारियों को लगेगा कि यह वायरस अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय नहीं है, तब ही एक्सपर्ट्स की एक कमेटी इसे महामारी की कैटेगरी से निकालने पर निर्णय लेगी। बताया गया है कि डब्ल्यूएचओ की एक एक्सपर्ट कमेटी हर तीन महीने में कोरोना से उभर रही स्थितियों पर बैठक करती है। हालांकि, यह स्थितियां हर देश में अलग-अलग भी हो सकती हैं और यह देश अपने स्तर पर महामारी के शुरू होने या खत्म होने का फैसला कर सकते हैं।
ड्यूक यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर क्रिस वुड्स के मुताबिक, ऐसा कोई एक दिन नहीं आएगा, जब कोई एलान कर देगा कि 'अच्छा अब महामारी खत्म हो गई है।' वैसे तो महामारी खत्म होने के फैसले का कोई तय मानक नहीं है, लेकिन सभी देशों में समय के साथ कोरोना के मामलों में कमी देखी जाएगी।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि कोरोनावायरस पूरी तरह खत्म होने की जगह एक साधारण से वायरस की तरह रह जाएगा। यानी एक फ्लू वायरस की तरह ही इसके केस सीजनल तौर पर आएंगे और अभी की तरह आगे इसके बड़े स्तर पर फैलने के मामले काफी कम मिलेंगे। वुड्स का कहना है कि इसके बावजूद सार्वजनिक स्थल पर मास्क पहनने जैसी आदतों को अपनाना जारी रखना पड़ सकता है। महामारी के अंत के बावजूद कोरोनावायरस हमारे साथ बना रह सकता है।