ब्रिटेन से बीते एक सप्ताह में केरल लौटे कम से कम आठ लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इन सभी के नमूने पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर वायरोलॉजी के लिए आगे के परीक्षण के लिए भेजे गए हैं ताकि पता चल सके कि वे नए स्ट्रेन से संक्रमित हैं या नहीं। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने यह जानकारी दी है।
मंत्री ने कहा कि कुछ यूरोपीय देशों में नए कोरोना को लेकर जारी अलर्ट के बाद राज्य के सभी चार हवाई अड्डों पर सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि हमने यहां भी वायरस में कुछ भिन्नता देखी है। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी यह कहना काफी जल्दबाजी भरा होगा कि क्या यह ब्रिटेन में मिले नए कोरोना की तरह है या नहीं।
उन्होंने कहा कि फिलहाल विशेषज्ञ इस पर एक विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है, परंतु लोगों को पहले की तरह ही सतर्कता जरूर बरतनी चाहिए।
पिछले हफ्ते, ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि उसके जीनोमिक विश्लेषण और महामारी विज्ञान के सबूतों से पता चला है कि सार्स-कोव 2 का एक नया संस्करण, देश के कुछ हिस्सों में पाया गया था। मौजूदा संस्करण की तुलना में यह 70 फीसदी अधिक खतरनाक था।
हालांकि, लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में सेंटर फॉर मैथमेटिकल मॉडलिंग ऑफ इंफेक्शियस डिजीज का एक अध्ययन यह आंकड़ा 56 फीसदी रखता है। नए स्ट्रेन के सामने आने के बाद कई देशों ने देश पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिए हैं।
इन राज्यों के ब्रिटेन से लौटे यात्री संक्रमित
कर्नाटक में ब्रिटेन से लौटे 2,500 लोगों में से 1,638 लोगों की जांच की गई है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के. सुधाकर ने बताया कि इनमें से 14 को कोरोना से संक्रमित पाया गया है। वहीं केरल में ब्रिटेन से लौटे आठ लोगों में कोरोना संक्रमण पाया गया है। ब्रिटेन से कुछ हफ्ते पहले महाराष्ट्र के औरंगाबाद आई एक महिला यात्री कोरोना संक्रमित पाई गई है। अधिकारियों ने बताया कि 25 नवंबर के बाद उक्त महिला समेत 44 लोग ब्रिटेन से औरंगाबाद जिले में आए थे। ब्रिटेन से आने वालों में से 11 की आरटी-पीसीआर जांच हुई, जिसमें से महिला संक्रमित पाई गई।
देश के विभिन्न हिस्सों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन से आए उत्तर प्रदेश में आठ, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में चार-चार और असम, पुणे और जम्मू-कश्मीर में एक-एक व्यक्ति को कोरोना से संक्रमित पाया गया है। सभी के नमूनों को जांच के लिए एनआइवी पुणे भेजा गया ताकि पता लगाया जा सके कि किसी में कोरोना की नई स्ट्रेन तो नहीं है।