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सुप्रीम कोर्ट: कोरोना मौत पर मुआवजे को लेकर आदेश किया स्पष्ट, असम सरकार ने दायर की थी याचिका

Mon, 14 Mar 2022 05:27 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोविड-19 महामारी में अपने माता-पिता दोनों को खो चुके 10,000 से अधिक बच्चों को मदद देने की कोशिशों में शीर्ष अदालत ने 19 जनवरी को मुआवजा देने का निर्देश दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कोविड -19 के कारण जान गंवाने वालों के परिजनों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि के संबंध में उसका पहले का दिया गया आदेश बहुत स्पष्ट है और हर मृत्यु के लिए भुगतान किया जाना है। शीर्ष अदालत ने असम द्वारा दायर एक आवेदन पर विचार करते हुए यह बात कही। इसमें अदालत से स्पष्ट करने की मांग की गई थी कि क्या एक से अधिक बच्चे होने पर मृतक माता-पिता के हर बच्चे को 50 हजार रुपये का भुगतान प्रदान किया जाएगा।

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अदालत ने कहा, हमारा आदेश बहुत स्पष्ट
न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि हमारा पहले का आदेश बहुत स्पष्ट है, 50 हजार रुपये का अनुग्रह भुगतान हर मृत्यु के लिए होगा। इसलिए यह स्पष्ट किया गया कि यदि एक से अधिक बच्चे हैं, या केवल एक बच्चा है, 50 हजार रुपये का अनुग्रह भुगतान मिलेगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई है, तो बच्चे को प्रत्येक मृत्यु के लिए 50-50 हजार रुपये मिलेंगे। 

10 हजार से अधिक बच्चों की मदद  
कोविड-19 महामारी में अपने माता-पिता दोनों को खो चुके 10,000 से अधिक बच्चों को मदद देने की कोशिशों में शीर्ष अदालत ने 19 जनवरी को सभी राज्य सरकारों को उन बच्चों तक पहुंचने और उन्हें मुआवजा देने का निर्देश दिया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान असम सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए एक आवेदन दायर किया है क्योंकि राज्य में ऐसे परिवार हैं जहां एक से अधिक बच्चे हैं।
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वकील ने पूछा कि क्या इसे दोनों बच्चों को देना है या परिवार को एकमुश्त भुगतान होना चाहिए। पीठ ने कहा कि उसका आदेश बहुत स्पष्ट है। यह प्रति मृत्यु 50,000 रुपये है। यह मुद्दा तब सामने आया जब शीर्ष अदालत अधिवक्ता गौरव बंसल और कुछ अन्य लोगों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने कोविड-19 पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को अनुग्रह सहायता देने की मांग की थी।

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