संक्रमित मां से जन्मे कुछ शिशु में कोरोना पहुंच सकता है। साथ ही उस बच्चे में संक्रमण के लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए जानकारी दी है कि देश में कोरोना संक्रमित माताओं से उनके शिशु तक में संक्रमण पहुंचने के मामले कम हैं लेकिन आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
मेडिकल जर्नल क्यूरिस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार संक्रमित माता से शिशु तक में संक्रमण पहुंचने की आशंका करीब 6.5 फीसदी है लेकिन संक्रमित शिशुओं में से एक तिहाई में गंभीर लक्षण विकसित रहने की आशंका हो सकती है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण पूरा कराने के साथ साथ संक्रमण को लेकर एहतियात बरतने की सलाह दी है।
मामले कम, एहतियात जरूरी
आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राहुल गजभिए ने बताया कि बीते काफी समय से उनकी टीम देश के अलग अलग हिस्सों में गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशुओं का कोरोना संक्रमण से संबंध को लेकर अध्ययन कर रही है। हाल ही में करीब 304 शिशु और 301 माताओं के चिकित्सीय दस्तावेजों की समीक्षा के बाद जानकारी मिली है कि शिशुओं में कोरोना संक्रमण के जोखिम से इन्कार नहीं कर सकते हैं। हालांकि इनके मामले कम हैं लेकिन एहतियात बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया, पिछले दिनों यह भी स्पष्ट हुआ कि कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर के दौरान संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या जरूर बढ़ी लेकिन उनमें संक्रमण का स्तर गंभीर नहीं था क्योंकि दूसरी लहर के बाद गर्भवती महिलाओं में टीकाकरण काफी तेजी से बढ़ा था। यह अब पूरी तरह से साबित हो चुका है कि टीकाकरण के जरिए गर्भवती महिला और उनके शिशु दोनों की सुरक्षा की जा सकती है।