कोविड-19 की लड़ाई में बूढ़े और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले ही सरकार की परेशानी बढ़ाएंगे। दुनिया से संक्रमितों के मिले आंकड़ों में सबसे अधिक शिकार यही वर्ग हुआ है। इसी वर्ग को सबसे ज्यादा वेंटिलेटर पर ले जाने की नौबत आई है। वहीं, देश में वेंटिलेटर की आपूर्ति एक चुनौती बनी हुई है।
पहली बार बना रहे हैं वेंटिलेटर
कोविड-19 की जंग में देश का साथ देने का वादा कई शीर्ष कंपनियों ने किया है। मारुति, हुंडई, कल्याणी ग्रुप, महिन्द्रा ने वेंटिलेटर समेत अन्य साजो-सामान के निर्माण और आपूर्ति में सहयोग का वादा किया है। लेकिन अभी इन कंपनियों द्वारा सामान्य वेंटिलेटर तैयार करके आर्डर के लिए सौंपने में ही सात-आठ दिन का समय लग सकता है।
एक शीर्ष कंपनी के चेयरमैन ने कहा कि हमारी प्रतिबद्धता पूरी है। वेटिंलेटर के निर्माण के लिए कंपनी के अनुसंधान सेंटर में काम चल रहा है। सूत्र का कहना है कि 10 अप्रैल तक कंपनी सामान्य वेंटिलेटर बनाकर इसे आर्डर के लिए प्रस्तुत कर देगी। इसकी अनुमति मिलने के बाद फिर हम हर सप्ताह वेंटिलेटर तैयार करने की क्षमता के बारे में कुछ बताने की स्थिति में होंगे।
स्मार्ट वेंटिलेटर बनाने में 30 अप्रैल तक का समय लगना संभव
कंपनी के चेयरमैन का कहना है कि रिसर्च में लगे कंपनी के इंजीनियरों से उन्होंने बात की है। वह स्मार्ट वेंटिलेटर पर काम कर रहे हैं। यह यूजर फ्रेंडली होगा, लेकिन इसका मॉडल 30 अप्रैल तक तैयार किया जा सकेगा। सूत्र का कहना है कि स्मार्ट वेंटिलेटर का मॉडल तैयार होने के बाद इसे हर महीने दो-तीन या पांच हजार की संख्या तक बना सकेंगे।