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दर्दनाक: एक साल के कोरोना संक्रमित बच्चे को नहीं मिला बेड, अस्पताल के बाहर तोड़ा दम, देखती रह गई बेबस मां

Wed, 28 Apr 2021 08:23 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विशाखापट्टनम

सार

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक साल के कोरोना संक्रमित बेटे के लिए अस्पताल वालों से गुहार लगाती रही, लेकिन बेड की कमी की वजह से उसे भर्ती नहीं किया। कुछ देर बाद मासूम ने अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ दिया और बेबस मां उसे देखती ही रह गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की रफ्तार इतनी घातक है कि स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। अस्पतालों में बेड की भारी किल्लत है, इसके चलते कोरोना संक्रमित मरीज अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ दे रहे हैं। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से एक ऐसा ही दर्दनाक मामला सामने आया है। एक मां अपने कोरोना संक्रमित एक साल के बेटे के लिए अस्पताल वालों से गुहार लगाती रही, लेकिन बेड की कमी की वजह से उसे अस्पताल ने भर्ती नहीं किया। कुछ देर बाद मासूम ने अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया और बेबस मां उसे देखती ही रह गई।

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यह दर्दनाक मामला विशाखापट्टनम के किंग जॉर्ज अस्पताल के बाहर का है। मंगलवार को एक परिवार अस्पताल पहुंचा। उनका एक साल के बेटे की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। अपने कलेजे के टुकड़े को तड़पते देख बेबस मां ने अस्पताल वालों से बच्चे को भर्ती करने की कितनी गुहार लगाई, लेकिन अस्पताल वालों ने बेड की कमी की वजह से मासूम को भर्ती करने से मना कर दिया। 

बच्चा एंबुलेंस में हांफ रहा था, उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। करीब एक घंटे तक मां गिड़गिड़ाती रही, रोती रही, बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए मिन्नतें करती रही, लेकिन अस्पताल वालों ने बेड की कमी के चलते मासूम को भर्ती नहीं किया। आखिरकार मासूम ने मां के सामने ही दम तोड़ दिया। 
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बता दें कि किंग जॉर्ज अस्पताल 150 साल से भी ज्यादा पुराना है और आंध्र प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, लेकिन इस अस्पताल ने भी बेड की कमी की वजह से बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया। मासूम की मौत ने आंध्र प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राज्य में लगातार बढ़ रहे कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए हाल ही में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए ऑक्सीजन के स्टॉक के बारे में पूछा था कि सरकार ने ऑक्सीजन का प्रोडक्शन बढ़ाया है या नहीं? इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ये आइसोलेशन वार्ड के बारे में भी जानकारी मांगी थी।

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