'शिकायत में बदलाव करना सीआरपीसी के खिलाफ नहीं'
कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायत में बदलाव करना सीआरपीसी के नियमों के खिलाफ नहीं है। सीआरपीसी की धारा 216 कोर्ट को यह अधिकार देती है कि वह किसी भी आरोप को बदल सकती है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई आरोप बदला जता है, तो उसका मतलब केवल कानून की उस धारा को बदलना होता है, जो किसी तथ्य पर लागू होती है। खुद तथ्य नहीं बदले जाते।
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द
लेकिन पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह बदलाव शिकायत की प्रकृति को बदलता है और इससे जीएसटी कानून के तहत टैक्स से जुड़े सवाल उठ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया और कहा कि यह एक ठीक की जा सकने वाली प्रक्रिया संबंधी गलती थी और इससे आरोपी को कोई नुकसान नहीं हुआ। इसलिए कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामूली बदलावों की इजाजत दी जा सकती है, जब तक कि उससे आरोपी के अधिकारों पर कोई बुरा असर न पड़े।