राजनीतिक दलों के नाम में धर्म, जाति और लिंग जैसे शब्दों के प्रयोग की मनाही है। एक पीआईएल के जरिए ऐसे दलों से उनके नामों में परिवर्तन कराने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई थी। इस याचिका की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने आज चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से इस मामले पर उनका रुख जानने के लिए नोटिस जारी किया है। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को चार हफ्तों में अपना जवाब दाखिल करना है।
जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस हरिशंकर की डिवीजन बेंच के सामने इस मामले में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून में ऐसे शब्दों के प्रयोग की स्पष्ट मनाही है, लेकिन इसके बाद भी कुछ दलों के नाम में हिंदू-मुस्लिम जैसे शब्द जुड़े हैं। आयोग को इन दलों को अपना नाम बदलने का निर्देश देना चाहिए।
उपाध्याय के मुताबिक अगर वे तीन महीने के अंदर ऐसा नहीं करते तो चुनाव आयोग उनकी मान्यता भी रद्द कर सकता है। याचिका में तिरंगे से मिलते जुलते पार्टी के झंडे के इस्तेमाल करने पर भी आपत्ति जताई गई है। कांग्रेस पार्टी का झंडा काफी हद तक तिरंगे से मिलता जुलता है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का नाम ऑल इंडिया मजलिस-ए--इत्तेहादुल मुस्लमीन है। इसके अलावा हिंदू महासभा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नाम से भी दल हैं।