फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कश्मीरी युवक की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

Wed, 10 Aug 2016 07:16 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
विज्ञापन
हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में हुए प्रदर्शन के शामिल एक युवक की कथित तौर पर हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस को जांच कर शुक्रवार तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि  रिपोर्ट दाखिल करने के बाद हमें देखेंगे कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की दरकार है या नहीं?
विज्ञापन


मजिस्ट्रेट ने डीएसपी यासिर कादरी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। साथ ही शीर्ष अदालत ने कश्मीर रेंज के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर रोक लगा दी है। मालूम हो कि आदेश के बावजूद डीएसपी पर हत्या का मामला दर्ज करने के कारण अदालत ने सोमवार को कश्मीर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि पुलिस अधिकारियों को भी मानवता एवं प्यार व स्नेह के साथ काम को अंजाम देना चाहिए। जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ के समक्ष कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश सही नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा हुआ तो हर दिन इस तरह का मामला दर्ज करना होगा। 
विज्ञापन

 
विज्ञापन

'शिकायत पूरी तरह से फर्जी है'

supreme court
पीठ ने कहा आप एफआईआर दर्ज कीजिए और फिर जांच कीजिए। पीठ ने कहा कि आपके लिए यहीं सबसे अच्छा होगा। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि शिकायत पूरी तरह से फर्जी है। उन्होंने कहा कि अगर हम डीएसपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करेंगे तो हमें डीएसपी को निलंबित करना होगा और गिरफ्तार करना होगा।

इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा जरूरी तो नहीं है। तब अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह जरूरी होता है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि गिरफ्तारी पर शुक्रवार तक की रोक लगाई जाए। पीठ ने कहा कि दो अलग-अलग वारदात है। हमें नहीं पता कि इनमें से कौन सच है। मुख्य बात है कि एक युवक की मौत हुई है।

जवाब में अटॉनी जनरल ने कहा कि पहले ही एक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में अलग से एफआईआर दर्ज करने की जरूरत क्या है। पहली एफआईआर में जांच के दौरान अगर पाया गया कि पुलिस अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार है तो उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा।

उन्होंने उदाहरण के तौर पर संदीप घड़ोली एनकाउंटर मामले का जिक्र किया जिसमें बाद में गुंडग़ांव पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जिसके बाद पीठ ने राज्य सरकार को इस पूरे प्रकरण की जांच कर शुक्रवार तक सीलबंद लिफाफ में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें