बुलंदशहर रेप कांड पर प्रदेश सरकार बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष कोई तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर पाई। सरकार की ओर से एक दिन की और मोहलत मांगी गई है। कोर्ट ने इसे मंजूर करते हुए कहा है कि पुलिस की जांच रिपोर्ट एसपी बुलंदशहर सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करें।
इसमें पकड़े गए अपराधियों की जानकारी के साथ उनकी सामाजिक और आपराधिक पृष्ठभूमि एवं राजनीतिक दलों से संबंध की जानकारी भी दी जाए। मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ द्वारा स्वत: संज्ञान ली गई जनहित याचिका पर महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने इस केस को लगभग सुलझा लिया है।
एक अभियुक्त की मेरठ से गिरफ्तारी हुई है, उससे काफी जानकारियां मिली हैं। अदालत ने इन जानकारियों को सार्वजनिक करने से रोकते हुए कहा है कि ये सभी बातें सीलबंद लिफाफे में बृहस्पतिवार को उनके समक्ष प्रस्तुत की जाए।
महाधिवक्ता ने कहा कि पुलिस की सफलता से अब सीबीआई जांच की बहुत आवश्यकता नहीं रह गई है हालांकि सीबीआई जांच कराने में सरकार को कोई परेशानी नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि वह सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट अन्य जानकारियां उपलब्ध होने के बाद इस मामले में उपयुक्त आदेश पारित करेंगे।