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एक दूसरे को नष्ट करने के प्रयास में बच्चों का बचपन बर्बाद कर देते हैं दंपती

Sat, 23 Jan 2021 05:13 AM IST
Jeet Kumar राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने एक दंपती से कहा कि आखिर और कितना लड़ोगे आप दोनों। आप लोग अपने बच्चों के बचपन और भाई-बहनों के बीच के बंधन को नष्ट करने पर क्यों तुले हो। एक-दूसरे के खिलाफ अंतहीन मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट ने नाखुशी जताई है।

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जस्टिस संजय किशन कॉल, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस ऋषिकेश राय की पीठ ने कहा, एक दूसरे को नष्ट करने के प्रयास में ऐसे जोड़े अपने बच्चों के बचपन को नष्ट कर देते हैं। माता-पिता के बीच ऐसे रिश्ते से बच्चों भ्रमित हो जाते है और वे भाई-बहनों के बंधन को खो देते हैं। पीठ ने कहा कि हम बार-बार कहते हैं कि ऐसे मामलों का निपटारा अदालत से नहीं हो पाता।

सुनवाई के दौरान पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पति-पत्नी से बात भी की। पीठ ने इस बात पर काफी अफसोस जताया कि दो दशक पहले प्रेम विवाह करने वाला दंपती आज एक दूसरे को नष्ट करने पर तुला है। उन्हें बच्चों की तनिक भी परवाह नहीं है।
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जस्टिस कौल ने दंपति से कहा, आप एक बार प्यार में थे। आपके तीन बच्चे हैं। आप एक-दूसरे को नष्ट करने में लगे हुए हैं। आपको न तो बच्चों की परवाह है और न ही अपनी खुशी की। अपनी नहीं तो अपने बच्चों की सोचिये।

बच्चों की शिक्षा पर दंपती में तकरार
दंपति दरअसल बच्चों की शिक्षा कहां होनी चाहिए, इसको लेकर अदालत पहुंच गए। तीनों बच्चे के पास अमेरिका और थाईलैंड की दोहरी नागरिकता है, लेकिन पति-पत्नी इस बात पर सहमत नहीं थे कि उनकी पढ़ाई कहां होनी चाहिए।

पिछले आदेश में पीठ ने तीन बेटों में से एक को अमेरिका भेजने को कहा था, हालांकि मां ने इसका विरोध किया था। सवाल यह था कि सबसे छोटा बेटा अपनी स्कूली शिक्षा के लिए कहां जाएगा। मां का कहना था कि वह थाईलैंड जाए, जबकि पिता चाहते थे कि वह मुंबई में रहे।

पीठ ने आदेश दिया है कि सबसे छोटा बेटा स्कूली शिक्षा थाईलैंड में लेगा और उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाएगा। पीठ ने कहा कि जब तक दुश्मनी नहीं छोड़ते, तब तक आपके बच्चों का आप से दूर रहना ही बेहतर है।

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