उज्बेकिस्तान में कफ सिरप से जुड़ी मौतें के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दवा बनाने वाली कंपनी से पूछा, क्या आपको पता है कि इससे देश की छवि को कितना नुकसान हुआ है? बता दें कि कंपनी के कफ सिरप की वजह से कथित तौर पर उज्बेकिस्तान में 18 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी।
शीर्ष अदालत ने कंपनी और उसके कुछ अधिकारियों को तलब करने वाले आदेश को खारिज करने से इनकार कर दिया। गौतम बुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मानक गुणवत्ता वाली दवाओं का निर्माण नहीं करने और बिक्री समेत विभिन्न उल्लंघनों के आरोप वाली शिकायत पर जनवरी 2024 में कंपनी व उसके अधिकारियों को समन किया था।
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा, सिर्फ पैसों के लिए आप ऐसा करते हैं, जिससे देश की छवि धूमिल होती है। कंपनी और उसके अधिकारियों के वकील ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि सिरप के सेवन से किसी की मौत हुई है। इस पर पीठ ने पूछा, क्या आपको एहसास है कि देश की छवि को कितना झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही कंपनी की याचिका को खारिज कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इन्कार कर दिया।
नोएडा में दायर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत एक शिकायत मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने समन आदेश जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था। ड्रग्स इंस्पेक्टर ने शिकायत में आरोप लगाया था कि कंपनी ने ऐसे दवाओं का निर्माण और बिक्री की, जिन्हें मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया गया था। साथ ही मिलावटी और नकली दवाओं से जुड़े प्रावधानों, प्रक्रियात्मक उल्लंघनों और कंपनी अधिकारियों की जवाबदेही से संबंधित धाराएं भी लगाई गईं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामला मुख्य रूप से लैब टेस्ट रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें कुछ सैंपलों को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं घोषित किया गया था, जिसके चलते अधिनियम की दंडात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू हुई।सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने यह भी दावा किया था कि संबंधित कंपनी द्वारा बनाया गया सिरप उज्बेकिस्तान में जहरीला पाया गया था, जिससे 18 से अधिक बच्चों की मौत हुई। समन आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश में कोई अवैधता या त्रुटि नजर नहीं आती।